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समकालीन कविता में परिवर्तन, आलोचक, दीक्षित कवि

  • कविता परिवर्तन- हिन्दी के अनेक कवियों ने प्रगतिवाद/प्रगतिशील आंदोलन के झंडे को हाथ में पकड़कर लिखना प्रारंभ किया था। बाद में प्रयोगवाद, नई कविता, सप्तकीय परंपरा और अकविता का जन्म हुआ। अनेक कवि प्राय: सभी आंदोलनों से जुड़े रहे। प्रयोगवादी कवियों का नया संस्करण ’नई कविता’ था। नई कविता के अनेक कवि ’अकविता’ और किस्म-किस्म की कविता के खेमों में जा घुसे। अवसरवादी इन कवियों में से आज भी अनेक कवि लिख रहे हैं। जैसे-जैसे कविता को नया नाम मिलता रहा वैसे-वैसे ये कवि उसमें शामिल होकर बहती गंगा में हाथ धोते रहे। इन कवियों के पास अपना मौलिक कुछ… (336 more words) …

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समकालीन कविता में विचार, भारतीय जीवन, भूकविता एवं घोषणा पत्र

  • पाश्चात्य काव्यबोध और विचार -उपरोक्त चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि आज कि हिन्दी-कविता में भारतीस ’भू’ की गरिमा अनुपस्थित है। विदेशी मोह में पड़कर भारतीय कवि यह भूल गया कि पाश्चात्य काव्यबोध की उत्पत्ति के पीछे वहाँ की संस्कृति और यहाँ की युगाानुरू परिवर्तनशीलता का हाथ था। भारतीय कवि ने वहाँ की काव्यानुभूतियों का भारतवर्ष पर थोप दिया। रूस की क्रांति के पीछे वहाँ की तात्कालिक परिस्थितियाँ जिम्मेवार थीं, परन्तु भारतवर्ष में क्रांतिकारी परविर्तन की कतई संभावना नहीं थी। भारतीय कवियों ने अपने भारतवर्ष की मानसिकता, संस्कृति, परविर्तनशीलता आदि को समझे बगैर पाश्चात्य काव्यबोध और विचार को… (371 more words) …

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