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छायावाद में समकालीन कविता

समकालीन कविता

  • हिन्दी कविता ’किसस-किसस‘ के आदांलनों के प्रभाव मुक्त हुई। विदेशी साहित्य के प्रभाव को ग्रहण कर विकसित होते ये आंदोलन स्वत: ही समाप्त हो गए। भारतीय संस्कृति के सूखते हुए स्त्रोंतों का सजृनात्मक स्तर पर बचाए रखने के प्रयासों से दो दशक की चुप्पी के बाद, जनवरी 1993 को समकालीन कविता का आरंभ हुआ। कवि कुमार कृष्ण तथा शरत्‌ आदि की कविताओं में ’समकालीन कविता आंदोलन’ की शुरूआत
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नई कविता की प्रवृत्तियाँ

नई कविता की प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-

  • यथार्थ चित्रण का आग्रह
  • सूक्ष्म व्यंग्य तथा शैलीगत वैचित्र्य
  • नए-नए अर्थों को ध्वनित करने वाला अभिनव प्रतीक-विधान
  • दो विश्वयुद्धों की पीड़ा
  • सामाजिक-आर्थिक वैषम्य पर चोट
  • अस्तिवाद की अभिव्यक्ति
  • नव मानववाद की ओर अग्रसरता
  • साधारणीकरण तथा रसात्मक का अभाव
  • अकेलापन, अजनबीपन
  • व्यंग्यात्मक प्रवृत्ति
  • मिथकीय प्रयोग
  • विश्व-मानव की प्रतिष्ठा के लिए प्रयास

कुछ अन्य प्रवृत्तियाँ-

  • घोर अंहिनिष्ठ व्यक्तिवाद- नई कविता में वैयक्तिक भाव आत्मविज्ञापन के
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