CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-छायावाद और उसके बाद (Chhayavaad and Later) Revision (Page 6 of 11)

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समकालीन कविता में विचार, भारतीय जीवन, भूकविता एवं घोषणा पत्र

  • पाश्चात्य काव्यबोध और विचार -उपरोक्त चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि आज कि हिन्दी-कविता में भारतीस ’भू’ की गरिमा अनुपस्थित है। विदेशी मोह में पड़कर भारतीय कवि यह भूल गया कि पाश्चात्य काव्यबोध की उत्पत्ति के पीछे वहाँ की संस्कृति और यहाँ की युगाानुरू परिवर्तनशीलता का हाथ था। भारतीय कवि ने वहाँ की काव्यानुभूतियों का भारतवर्ष पर थोप दिया। रूस की क्रांति के पीछे वहाँ की तात्कालिक परिस्थितियाँ जिम्मेवार थीं, परन्तु भारतवर्ष में क्रांतिकारी परविर्तन की कतई संभावना नहीं थी। भारतीय कवियों ने

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समकालीन में पत्रकारिताएँ

समकालीन साहित्यिक पत्रकारिता

हिन्दी की सर्वप्रथम पत्रिका उर्दंड मार्तंण्ड के प्रकाशन युगल किशोर के संपादन में ’कोल्हू टोला’ के अमड़ाताला की गलि के 37 अंक की हवेली (कलकत्ता) से हुआ।

स्वातन्त्र्योत्तर काल में

प्रकाशन की होड़ और बढ़ती-बदलती प्रतिदव्न्िदव्ता एवं वर्ग-गुट-विकास आदि कई कारण भी नई-नई पत्र-पत्रिकाओं के जन्म के कारण बने।

इस युग की प्रमुख पत्र-पत्रिकायें हैं-

  • धार्मिक-दार्शनिक- जनवाणी, जैनमित्र, कल्याण, कल्पवृक्ष, गीताधर्म, कबीर-संदेश, आर्य जगत और दयानन्द संदेश।
  • शोध गवेष्णा-शोध

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