CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-छायावाद और उसके बाद (Chhayavaad and Later) Revision (Page 4 of 11)

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छायावाद के कवि - भगवती चरण शर्मा

भगवती चरण शर्मा- इस युग के अंत में कवि छायावादी रहस्यात्मकता को त्यागकर व्यक्तिवादी होता गया। इस प्रकार के कवियों में भगवतीचरण वर्मा का नाम उल्लेखनीय है। कवि की अपेक्षा उपान्यासकार के रूप में वर्मा जी को अधिक ख्याति मिली। कवि के रूप में वर्मा जी को प्रेम यौवन और उल्लास का कवि माना जाता है। उनकी कविता में मस्ती का आलम दिखाई देता हैं।

हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ कल वहाँ चले।

मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।।

वर्मा जी के बाद की कविताओं में प्रगतिवादी स्वर गूँजने लग

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छायावाद की प्रवृत्तियाँ

उत्तर छायावाद में तीन प्रमुख काव्य प्रवृत्तियाँ देखने को मिलती हैं-

  • प्रगतिवादी काव्यधारा- (आरंभ 1936 ई. से)
  • निराला- कुकुरमुत्ता, गर्म पर्काड़ी, खजोहरा, प्रेमसंगीत, मास्को डायलॉग्स तथा नए पत्ते।
  • नागार्जुन-बादल को घिरते देखा, पाषाणी, चंदना, सिन्दूर तिलकित भाल, तुम्हारी दंतुरित मुस्कान।
  • केदारनाथ अग्रवाल-फूल नहीं रंग बोलते हैं, युग की गंगा।
  • शिवमंगल सिंह सुमन-मास्को अब भी दूर हैं।
  • अन्य प्रमुख कवि हैं- शंकर शैलेन्द्र, त्रिलोचन, रामेश्वर शुक्ल ’अचल’ रामधारी सिंह दिनकर, नरेन्द्र शर्मा मुक्ति

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