CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-छायावाद और उसके बाद (Chhayavaad and Later) Revision (Page 10 of 11)

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नई कविता का आरंभ, विचार, कवि व नामकरण

  • नई कविता

    दूसरा सप्तक के प्रकाशन (1951) से नई कविता का आरंभ माना जाता है। इसके कवि वहीं हैं। जो प्रयोगवाद के थे। प्रवर्तक भी अज्ञेय तथा मुक्तिबोध है। इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में डॉ. रामस्वरूप एवं लश्मीकांत वर्मा दव्ारा संपादित नये पत्ते के प्रकाशन के साथ ’नयी कविता’ पत्रिका (1954) का प्रकाशन का श्रीगणेश हुआ। इसके संपादक-विजयदेव नारायण साही) इसके साथ ही नई प्रवृत्तिवाली कविताओं के लिए नई कविता शब्द प्रयुक्त होने लगा। तथा ’निकष’ पत्रिका (1955 ई. संपादक-धर्मवीर भारती तथा लक्ष्मीकांत वर्म

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नई कविता की प्रवृत्तियाँ

नई कविता की प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-

  • यथार्थ चित्रण का आग्रह
  • सूक्ष्म व्यंग्य तथा शैलीगत वैचित्र्य
  • नए-नए अर्थों को ध्वनित करने वाला अभिनव प्रतीक-विधान
  • दो विश्वयुद्धों की पीड़ा
  • सामाजिक-आर्थिक वैषम्य पर चोट
  • अस्तिवाद की अभिव्यक्ति
  • नव मानववाद की ओर अग्रसरता
  • साधारणीकरण तथा रसात्मक का अभाव
  • अकेलापन, अजनबीपन
  • व्यंग्यात्मक प्रवृत्ति
  • मिथकीय प्रयोग
  • विश्व-मानव की प्रतिष्ठा के लिए प्रयास

कुछ अन्य प्रवृत्तियाँ-

  • घोर अंहिनिष्ठ व्यक्तिवाद- नई कविता में वैयक्तिक भाव आत्मविज्ञापन के रूप में व्यक्त हु

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