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छायावाद के कवि - भगवती चरण शर्मा

भगवती चरण शर्मा- इस युग के अंत में कवि छायावादी रहस्यात्मकता को त्यागकर व्यक्तिवादी होता गया। इस प्रकार के कवियों में भगवतीचरण वर्मा का नाम उल्लेखनीय है। कवि की अपेक्षा उपान्यासकार के रूप में वर्मा जी को अधिक ख्याति मिली। कवि के रूप में वर्मा जी को प्रेम यौवन और उल्लास का कवि माना जाता है। उनकी कविता में मस्ती का आलम दिखाई देता हैं।

हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ कल वहाँ चले।

मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।।

वर्मा जी के बाद की कविताओं में प्रगतिवादी स्वर गूँजने लगे। शोषितों के… (78 more words) …

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प्रयोगवाद युग के कवि

प्रमुख प्रयोगवादी कवि- नागार्जुन, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन, रांगेय राघव, नरेन्द्र शर्मा, नेमिचंद जैन, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, गिरिजाकुमार माथुर, शमशेर बहादुर सिंह, मुक्तिबोध, भारत-भूषण अग्रवाली, प्रभाकर माचवे आदि। गजानन माधव मुक्तिबोध प्रगतिवादी काव्यधारा के मुख्य कवि हैं। छायावाद के कुछ कवियों में प्रगतिवादी विचारधारा प्रबल रूप से प्रकट हुई हैं।

यहाँ कुछ प्रयोगवादी कवियों का परिचय दिया जाता हैं। जो निम्न हैं-

सच्चिदांनद हीरानन्द वात्स्यायन ’अज्ञेय’- प्रयोगवाद के प्रवर्तक अज्ञेय कवि माने जाते हैं। कवि उपन्यासकार, कहानी लेखक तथा आलोचक के रूप में अज्ञेय ने हिन्दी कविता को नई चेतना… (650 more words) …

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