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रासो का कथानक

उपरोक्त वर्णित रूपान्तरों तथा अन्य प्राप्त प्रतियों का अन्वेषण करने से प्रतीत होता है कि पृथ्वीराज रासो में कथा सूत्रों की भरमार है। इसमें चौहान वंश की उत्पत्ति और पृथ्वीराज के जीवन की विस्तृत झांकी है। समस्त कथानक को चार भागों वर्गीकृत किया जा सकता है।

  1. पृथ्वीराज के शौर्य की कथा- इसमें शहाबुद्दीन गौरी के साथ अनेक युद्धों, उसका शौर्य उदारता, आदर्श, क्षमा का चित्रण है। अन्य अनेक राजाओं को परास्त करना, हुसैन को शरण देना आदि कथाएं हैं।
  2. पृथ्वीराज के विवाह- इच्छावती, पद्यावती, शशिव्रता, इन्द्रावती, हंसवती, संयोगिता आदि से विवाह है।
  3. पृथ्वीराज के आखेट-
  4. पृथ्वीराज के विलास- होली… (420 more words) …

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आरंभिक गद्य तथा लौकिक साहित्य

गद्य साहित्य-

राउलबेल-कवि रोड़उ (11वीं शताब्दी), उक्ति व्यक्ति प्रकरण-दामोदर शर्मा (1154 ई. वर्ण रत्नाकार-ज्योतिरीश्वर ठाकुर (1400 ई. )

लौकिक साहित्य

आदिकाल में पूर्वोक्त प्रमुख प्रवृत्तियों के अलावा स्वच्छंद रूप में लौकिक विषयों पर ग्रंथ लिखने की प्रवृत्ति भी मिलती हे। यहाँ हम आदिकाल में उपलब्ध सभी लौकिक काव्यों का परिचय देकर इस स्वच्छधारा की प्रवृत्तियों को स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे।

ढोला-मारू रा दूहा-

11वीं शताब्दी में रचित यह एक लोकभाषा-काव्य है। ’दूहा घणां पुराणां अछइ’ पंक्ति इसकी प्राचीनता की ओर ही संकेत करती हे। पश्चिमी हिन्दी-प्रदेश (राजस्थान) में यह काव्य अत्यंत लोकप्रिया रहा है। इस संबंध में प्रस्तुत कथन… (1148 more words) …

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