CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आदिकाल (Beginning Era) Revision (Page 8 of 15)

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गद्य-साहित्य

  • आदिकाल में काव्य-रचना के साथ-साथ-रचना की दिशा में भी कुछ स्फुट प्रयास लक्षित होते हैं। ’राउलवेल’ (चम्पू) ’उक्ति-व्यक्ति-प्रकारण’ और ’वर्णरत्नाकर’ इस संदर्भ में उल्लेखनीय रचनाएं हैं।
  • राउलवेल- यह एक शिलांकित कृति है, जिसका पाठ बम्बई के ’प्रिंस ऑफ वेल्स’ संग्रहालय से उपलब्ध कर प्रकाशित करया गया है। विदव्ानों ने इसका रचना-काल 10वीं शताब्दी माना है। यह गद्य-पद्य-मिश्रत चम्पू-काव्य की प्राचीनतम हिन्दी -कृति है। इसकी रचना ’राउल’ नायिका के नखशिख-वर्णन के प्रसंग में हुई है। इस कृति का रचियता

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हिन्दी साहित्य का इतिहास

  • पृष्ठीभूमि: -आदि सभ्यता की कीड़ा स्थली भारतभूमि सांस्कृतिक रूप से आज भी समृद्ध और सम्पन्न है। भारत एक विशाल देश है। इसके आदर्श और उसकी परम्पराँ उच्च एवं महान्‌ हैं। यहाँ महर्षि वेद व्यास ने वेदों का संकलन कर बाहर के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो अदव्तीय और अनुपम है। आदिकवि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य की रचना कर इसी भूमि को गौरवान्वित किया तथा विश्व कवि कालिदास ने इसी भूमि को अपने काव्य रस से सिंचित किया। ऋषि-मुनियों की यह पावन-भूमि आज भी अपनी संतति को सुख और शांति प्रदा

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