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हिन्दी साहित्य का इतिहास का ग्रंथ

हिन्दी साहित्य का इतिहास का अध्ययन ग्रंथों की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा। प्रारंभ में कई इस प्रकार के इतिहास ग्रंथों की रचना हुई जिनसे हिन्दी कवियों और लेखकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय मिलता है। यह प्रयत्न व्यष्टि रूप से हुआ, समष्टि रूप से नहीं। ’चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ और ’भक्तमाल’ आदि ग्रंथों की रचना कवि संप्रदास विशेष के दष्टिकोण से ही की गई है। इनमें ऐतिहासिक दृष्टिकोण का अभाव हैं।

हिन्दी साहित्य का इतिहास लेखन के बीज तो हमें ’चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ ’दौ सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ नामक ग्रंथों में मिल जाते हैं, पर प्रस्तुत… (2100 more words) …

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हिन्दी साहित्य का इतिहास

  • पृष्ठीभूमि: -आदि सभ्यता की कीड़ा स्थली भारतभूमि सांस्कृतिक रूप से आज भी समृद्ध और सम्पन्न है। भारत एक विशाल देश है। इसके आदर्श और उसकी परम्पराँ उच्च एवं महान्‌ हैं। यहाँ महर्षि वेद व्यास ने वेदों का संकलन कर बाहर के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो अदव्तीय और अनुपम है। आदिकवि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य की रचना कर इसी भूमि को गौरवान्वित किया तथा विश्व कवि कालिदास ने इसी भूमि को अपने काव्य रस से सिंचित किया। ऋषि-मुनियों की यह पावन-भूमि आज भी अपनी संतति को सुख और शांति प्रदान कर रही है।
  • वर्तमान काल में… (59 more words) …

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