CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आदिकाल (Beginning Era) Revision (Page 6 of 15)

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नाथ-साहित्य

  • ईसा की 8वीं सदी में सिद्धों के बाद वज्रयान से ’नाथ संप्रदाय’ का उद्भव हुआ। नाथ हठयोग के मार्ग का प्रतिपादन करते थे और सदाचार का पालन करने पर जोर देते थे। नाथपंथी योगी ’कनफटे’ या ’कनफड़े कहलाते हैं। नाथों की भाषा पुरानी पश्चिमी हिन्दी है जिसका विकास नागर अपभ्रंश से हुआ तथा जिसका विकसित रूप ’सधुक्कड़ी’ कहलाता है।
  • सिद्धों की वाममार्गी भोगप्रधान योग-साधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथपन्थियों की हठयोग-साधना आरंभ हुई। राहुल जी ने नाथ-पंथ को सिद्धों की परम्परा का ही विकसित रूप मान

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अमीर खुसरों की हिन्दी कविता

अमीर खुसरों (1253 - 1325 ई. ) को हिन्दवी अथात्‌ खड़ी बोली का प्रथम कवि माना जाता है। वस्तुत: वे अरबी-फारसी के कवि थे किन्तु हिन्दी के प्रति भी उन्हें स्नेह था। इनका वास्तविक नाम अब्दुल हसन था। उनका जन्म एटा जिले के पटियाली गाँव में हुआ था। वे निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे।

अमीर खुसरों ने पहलियों, मुकरियों, दो सुखने तथा ढकोसलों आदि की रचना की है। उन्होंने ’खालिकबारी’ नाम से फारसी हिन्दी कोश भी लिखा है।

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