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रासों को अप्रमाणिकता के पक्ष में तर्क

  • घटना विरोध- रासों में प्राप्त अनेक घटनाएं और नाम इतिहास से मेल नहीं खाते हैं। जैसे-रासो में परमार, चालुक्य और चौहानों को अग्निवंशी बताया गया है जबकि प्राचीन ग्रंथ और शिलालेखों में वे सुर्यवंशी अंकित है। पृथ्वीराज की माता, वंश पुत्र आदि के नाम पृथ्वीराज-विजय के नामों से भिन्न हैं। गौरी शंकर हीराचन्द औझा के अनुसार संयोगिता स्वयं की बात इतिहास-सिद्ध नहीं हैं। इतिहास के अनुसार अनंगपाल दिल्ली का शासक नहीं था तथा पृथ्वीराज की माँ का नाम कर्पूरी देवी था। गौरी को शब्द-भेद बाण से मारने की घटना भी कल्पना-प्रस्तुत है। पृथ्वीराज के विवाहों की बात भी इतिहास से… (199 more words) …

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हिन्दी साहित्य का आरंभ कब और कैसे

  • अपभ्रंश अपने मूल रूप में ही 15वीं शताब्दी तक साहित्य की भाषा बनी रही, तथापि 8वीं शताब्दी से ही बोलचाल की भाषा पृथक हो कर उसके सामानान्तर साहित्य-रचना का माध्यम बन गयी थी। इसी भाषा को कुछ विदव्ानों ने उत्तर अपभ्रंश या ’पुरानी हिन्दी’ कहा है और कुछ विदव्ानों ने ’अवहट्ट’ नाम दिया है। वह भाषा ’हिन्दी’ है, उसे ’उत्तर अपभ्रंश’ या ’अवहट्ट’ नाम देना भ्रम उत्पन्न करना है। जिन विदव्ानों ने प्रस्तुत नाम दिये हैं, वे भी अपने मत के अंतर्गत प्राय: उक्त तथ्य का समर्थन करते रहे हैं। चंद्रधर शर्मा गुलेरी पहले विदव्ान हैं जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में… (1562 more words) …

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