CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आदिकाल (Beginning Era) Revision (Page 4 of 15)

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रासों को अप्रमाणिकता के पक्ष में तर्क

  • घटना विरोध- रासों में प्राप्त अनेक घटनाएं और नाम इतिहास से मेल नहीं खाते हैं। जैसे-रासो में परमार, चालुक्य और चौहानों को अग्निवंशी बताया गया है जबकि प्राचीन ग्रंथ और शिलालेखों में वे सुर्यवंशी अंकित है। पृथ्वीराज की माता, वंश पुत्र आदि के नाम पृथ्वीराज-विजय के नामों से भिन्न हैं। गौरी शंकर हीराचन्द औझा के अनुसार संयोगिता स्वयं की बात इतिहास-सिद्ध नहीं हैं। इतिहास के अनुसार अनंगपाल दिल्ली का शासक नहीं था तथा पृथ्वीराज की माँ का नाम कर्पूरी देवी था। गौरी को शब्द-भेद बाण से मारने की घटन

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रासो की प्रमाणिकता के पक्ष में विचार

रासों जैसे साहित्यिक श्रेष्ठ प्रबंध काव्य को एकदम जाली और अप्रमाणिक नहीं ठहराया जा सकता। इसमें बहुत कुछ प्रक्षिप्त अंश हैं। इसका मूल रूप साहित्य और भाषा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके लघुतम संस्करण में प्रक्षिप्त अंग नगण्य हैं। मुनि श्री जिनविजय रासो को मूल रूप में छोटा-सा काव्य ही मानते हैं। पुरातन-प्रबंध-संग्रह में ऐसे चार छंद मिले हैं जो रासो की लघुत्तम प्रतियों में भी उपलब्ध होता हैं।

इसकी प्रमाणिकता के संबंध में विदव्ानों में भिन्न-भिन्न मत व्यक्त किए हैं-

  • डॉ. दशरथ उन संदेहों

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