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नाथ-साहित्य

  • ईसा की 8वीं सदी में सिद्धों के बाद वज्रयान से ’नाथ संप्रदाय’ का उद्भव हुआ। नाथ हठयोग के मार्ग का प्रतिपादन करते थे और सदाचार का पालन करने पर जोर देते थे। नाथपंथी योगी ’कनफटे’ या ’कनफड़े कहलाते हैं। नाथों की भाषा पुरानी पश्चिमी हिन्दी है जिसका विकास नागर अपभ्रंश से हुआ तथा जिसका विकसित रूप ’सधुक्कड़ी’ कहलाता है।
  • सिद्धों की वाममार्गी भोगप्रधान योग-साधना की प्रतिक्रिया के रूप में आदिकाल में नाथपन्थियों की हठयोग-साधना आरंभ हुई। राहुल जी ने नाथ-पंथ को सिद्धों की परम्परा का ही विकसित रूप माना हैं। इस पंथ के चलाने वाले मत्स्येनद्रनाथ (मछन्दरनाथ) तथा गोरखनाथ माने… (881 more words) …

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विद्यापति और उनकी पदावली

  • विद्यापति का जन्म 1350 ई. में बिहार के दरभंगा जिले के विसपी नामक ग्राम में हुआ। विद्यापति दव्ारा रचित पदावली के अतिरिक्त उनके 12 ग्रंथ और मिलते है। जो निम्नलिखित हैं।

Vidhyapati & their Proses

Vidhyapati & their Proses

गिनती

ग्रंथ

1

कीर्तिलता,

2

कीर्तिपताका

3

गौरक्षा

4

भूपरिक्रमा

5

पुरुष परीक्षा

6

लिखनवाली

7

शैव सर्वस्वसार

8

शैव सर्वस्वसार प्रमाणभूत पुराण संग्रह,

9

गंगावाक्यावली

10

विभागसार,

11

दानवाक्यावली

12

दुर्गाभक्ति तरंगिणी।

  • विद्यापति दव्ारा रचित ’कीर्तिपताका’’ अपभ्रंश में, पदावली मैथिली में तथा शेष रचनाएँ संस्कृत में है।
  • विद्यापति राजा शिवसिंह तथा उनकी पत्नी लखिमादेई के आश्रित कवि थे।
  • विद्यापति पद… (106 more words) …

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