CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आदिकाल (Beginning Era) Revision (Page 10 of 15)

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हिन्दी साहित्य का इतिहास का ग्रंथ

हिन्दी साहित्य का इतिहास का अध्ययन ग्रंथों की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा। प्रारंभ में कई इस प्रकार के इतिहास ग्रंथों की रचना हुई जिनसे हिन्दी कवियों और लेखकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय मिलता है। यह प्रयत्न व्यष्टि रूप से हुआ, समष्टि रूप से नहीं। ’चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ और ’भक्तमाल’ आदि ग्रंथों की रचना कवि संप्रदास विशेष के दष्टिकोण से ही की गई है। इनमें ऐतिहासिक दृष्टिकोण का अभाव हैं।

हिन्दी साहित्य का इतिहास लेखन के बीज तो हमें ’चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ ’दौ सौ बावन वैष्

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हिन्दी के प्रमुख साहित्यिक केन्द्र व संस्थाएँ

  • रॉयल एशियाटिक सोसाइटी, कलकत्ता-संस्थापक विलियम जोन्स। पृथ्वीरास रासों तथा ग्रियर्सन कृत इतिहास ग्रंथ का प्रकाशन।
  • फोर्ट विलियम कॉलेज, कलकत्ता-सन्‌ 1799 में स्थापना हुई। गिलक्रिस्ट हिन्दुस्तानी के अध्यापक जिनका अनेक हिन्दी पुस्तकों के निर्माण में सहयोग रहा है।
  • आर्यसमाज- स्वामी दयानंद दव्ारा स्थापना सन्‌ 1875 में हुई। सत्यार्थ प्रकाश की रचना तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में योगदान।
  • नागरी प्रचारिणी सभा, काशी-सन्‌ 1897 की स्थापना हुई। हिन्दी के शब्दकोश तथा हिन्दी साहित्य के इतिहास का निर्म

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