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चन्दबरदाई व्यक्तित्व एवं कृतित्व

  • पृथ्वीराज रासो जैसे लोक-प्रसिद्ध ग्रंथ के रचनाकार ने लोक-प्रसिद्ध, इतिहास-प्रसिद्ध कवि चन्दबरदाई के जीवन-वृत्त के बारे में अनेक संदेह उत्पन्न किये गए हैं। यह आश्चर्य की बात है कि पृथ्वीराज रासो की प्रमाणिकता पर तो प्रश्न-चिन्ह लगाये गये हैं। साथ ही चन्दबरदाई के ऐतिहासिक अस्तित्व और पृथ्वीराज के समय में इसकी उपस्थिति को भी नकारने का दुस्साहस किया जा रहा है।
  • ज्ञातव्य है कि चन्दबरदाई अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान का दरबारी कवि और मित्र था। उसका जन्म पृथ्वीराज के साथ वि. सं. 1206 में हुआ। रासों में ’एक थल जनम, एक थल मरण विधान’ का अंत: साक्ष्य उपलब्ध हे।… (435 more words) …

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रासो साहित्य

साहित्य का निर्माण परम्पराओं से होता है। कोई भी कवि किसी न किसी परम्परा का सहारा लेकर काव्य रचना की ओर प्रवृत्त होता है। हिन्दी साहित्य में प्रत्येक युग किसी न किसी परम्परा का सहारा लेकर ही निर्मित हुआ है। रासो काव्य -परम्परा इसका अपवाद नहीं हैं। रासो काव्य की परम्परायें हिन्दी साहित्य के प्रारम्भिक काल से शुरू होकर और निरन्तर निर्बाध रूप से विकसित होती रही है। इस परम्परा के बीच-बीच में कतिपय परिवर्तन भी हुए किन्तु वे परिवर्तन ऐसे नहीं थे, जिन्हें मौलिक और विशिष्ट परिवर्तन कहा जा सके।

हिन्दी परम्परा के कवि

कवि चन्द्रबरदाई के जन्म को… (1787 more words) …

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