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देवनागरी लिपि में सुधार और संशोधन

समय-समय पर देवनागरी लिपि में सुधार और संशोधन के जो प्रयास किए गए, उन्हें ही देवनागरी का विकास कहते हैं। इस संबंध में निम्न तथ्य उल्लेखनीय हैं-

  • सबसे पहले महादेव गोविन्द रानाडे दव्ारा लिपि सुधार समिति गठित की थी।
  • महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुणे दव्ारा लिपि सुधार योजना बनाई।
  • 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में बाल गंगाधर तिलक ने अपने समाचार-पत्र ’केसरी’ में लिपि सुधार की व्यापक चर्चा की है। इसी विकास क्रम में आगे चलकर वीर सावरकर, महात्मा गांधी, विनोबा भावे, काका कालेलकर और आचार्य नरेन्द्र देव ने लिपि में सुधार एवं संशोधन के प्रयास किए है।
  • काका कालेलकर ने ’अ’… (343 more words) …

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देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता

देवनागरी लिपि रोमन एवं फारसी लिपि की तुलना में अधिक वैज्ञानिक है। इस लिपि में गुण अधिक लिखित दोष न्यूनतम हैं। इसकी वैज्ञानिकता के प्रमुख हिन्दू निम्नलिखित हैं-

  • हिन्दी की देवनागरी लिपि के विभाजन में पूर्ण वैज्ञानिकता है। इसमें कुल 52 वर्ण हैं। जो वर्णमाला इस प्रकार हें-

Hindi Alphabets and its details

Details of hindi alphabets

वर्णमाला

शब्द

गिनती

गिनती

स्वर-अ, आ, इ, ई आदि

= 11

अनुस्वार

(-)

= 1

विसर्ग (: )

= 1

व्यंजन-

कंठ्‌य- क, ख, ग आदि

5

तालव्य- च, छ, ज आदि

5

5

दंत्य- त, थ, द, आदि

5

ओष्ठ्‌य- प,… (436 more words) …

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