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नागरी लिपि का विकास और उसका मानकीकरण

  • प्रत्येक भाषा की अपनी लिपि होती है जिसमें उस भाषा को लिखा जाता है। ध्वनि संकेतो के लिखित रूप को लिपि कहते हैं। हिन्दी नागरी या देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। अंग्रेजी, रोमन लिपि में, उर्दू फारसी लिपि में तथा पंजाबी, गुरुमुखी लिपि में लिखी जाती है। भारत के दो प्राचीन लिपियाँ ब्राह्यी लिपि और खरोष्ठी लिपि थीं। आगे चलकर ब्राह्यी लिपि से ही देवनागरी लिपि का विकास हुआ है।
  • देवानागरी लिपि संस्कत, प्राकृत अपभ्रंश, हिन्दी, मराठी, नेपाली आदि भाषाओं में लिखने की लिपि है। देवनागरी लिपि का समुचित विकास 8वीं शताब्दी में हुआ। तात्कालिक समाज में यह गुजरात… (165 more words) …

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मानककीरण की प्रक्रिया चार चरण

मानककीरण की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती हैं जो निम्न प्रकार से हैं-

  1. चयन- किसी भाषा के विविध क्षेत्रीय या सामाजिक रूपों में किसी एक का, सबसे पहले मानक भाषा के रूप में चयन होता है। इस चयन का आधार उस रूप का देश की राजधानी के समीप बोला जाना या धर्म, राजनीति, साहित्य आदि के कारण उसका महत्व होता हैं मानक हिन्दी, चीनी, अंग्रेजी आदि सभी का चयन प्राय: धर्म, राजनीति, साहित्य में से किसी एक या अधिक के आधार के आधार पर हुआ है। मानक फ्रांसीसी मूलत: पेरिस की शिष्ट भाषा है तो फ़िनलैंड की मानक भाषा… (152 more words) …

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