CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-मानक भाषा (Standard Language) Revision (Page 1 of 3)

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मानक हिन्दी भाषा का वैज्ञानिक वितरण (रूपगत)

मानक भाषा

भाषा के प्रचार और प्रसार के साथ उसके मौलिक रूप में विभिन्नता व अनेकरूपता उत्पन्न हो जाती है। कहीं-कहीं शब्दों के अर्थ में भी अंतर आ जाता है और वर्ण-रचना में भी बदलाव आ जाता है। वाक्य-संरचना के कारण भी भाषा के स्वरूप के कारण भ्रम उत्पन्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में शिक्षित एवं विशिष्टजन दव्ारा जिस रूप का प्रयोग किया जाता है, उसे भाषा का मानक रूप कहा जाता है। इसे रेडियो, दूरदर्शन दव्ारा जिस स्वरूप का प्रयोग होता है, वही मानक रूप माना जाता है। भारत सरकार दव्ारा हिंदी का मानक रू

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मानककीरण की प्रक्रिया चार चरण

मानककीरण की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती हैं जो निम्न प्रकार से हैं-

  1. चयन- किसी भाषा के विविध क्षेत्रीय या सामाजिक रूपों में किसी एक का, सबसे पहले मानक भाषा के रूप में चयन होता है। इस चयन का आधार उस रूप का देश की राजधानी के समीप बोला जाना या धर्म, राजनीति, साहित्य आदि के कारण उसका महत्व होता हैं मानक हिन्दी, चीनी, अंग्रेजी आदि सभी का चयन प्राय: धर्म, राजनीति, साहित्य में से किसी एक या अधिक के आधार के आधार पर हुआ है। मानक फ्रांसीसी मूलत: पेरिस की शिष्ट भाषा है तो फ़िनलैंड की मानक

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