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देवनागरी लिपि का मानकीकरण

लिपि में पाई जाने वाली विषमरूपता को दूर कर उसमें एकरूपता लाना ही मानकीकरण है। लिपि के मानकीकरण करने के लिए निम्न तथ्य महत्वपूर्ण हैं-

  • एक ध्वनि को अंकित करने के लिए विविध लिपि चिह्‌नों में से किसी एक को ही मान्यता दी जाती है। जैसे देवनागरी लिपि में निम्न वर्ण दव्विध प्रकार से लिखे जाते हैं
  • अ, झ, ल, ध, भ, ण
  • अ, झ, ल, ध, भ, राा

प्रस्तुत प्रथम पंक्ति में लिखे हुए वर्ण ही मान्य हैं दव्तीय पंक्ति के वर्ण अमान्य हैं।

  • ध्वनियों के उच्चारण में भी एकरूपता लानी आवश्यक हैं। क्षेत्रीय उच्चारण के कारण लोग अलग-अलग… (402 more words) …

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मानक हिन्दी भाषा का वैज्ञानिक वितरण (रूपगत)

मानक भाषा

भाषा के प्रचार और प्रसार के साथ उसके मौलिक रूप में विभिन्नता व अनेकरूपता उत्पन्न हो जाती है। कहीं-कहीं शब्दों के अर्थ में भी अंतर आ जाता है और वर्ण-रचना में भी बदलाव आ जाता है। वाक्य-संरचना के कारण भी भाषा के स्वरूप के कारण भ्रम उत्पन्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में शिक्षित एवं विशिष्टजन दव्ारा जिस रूप का प्रयोग किया जाता है, उसे भाषा का मानक रूप कहा जाता है। इसे रेडियो, दूरदर्शन दव्ारा जिस स्वरूप का प्रयोग होता है, वही मानक रूप माना जाता है। भारत सरकार दव्ारा हिंदी का मानक रूप प्रतिपादित किया गया।… (1111 more words) …

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