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काव्य भाषा के रूप में ब्रजभाषा का उदय और विकास

  • आधुनिक काल में पं. दव्ारका प्रसाद मिश्र ने कृष्णायन की रचना अवधी भाषा में की है जो कृष्णचरित्र को प्रस्तुत करने वाला महाकाव्य है। रमई काका भी आधुनिक अवधी के कवि हैं।
  • ब्रजमंडल में बोलने के कारण इसे ब्रजभाषा कहा जाता है, खड़ी बोली के साहित्यिक पद पर आसीन होने के पहले ब्रजभाषा ही प्रमुख साहित्यिक भाषा थी। इस भाषा में अत्यंत उच्च कोटि का साहित्यिक का जन्म हुआ है।
  • शौरसेनी अथवा नागर अपभ्रंश से उत्पन्न ब्रजभाषा साहित्यिक रचना विक्रम स. की 12वीं सदी से आरम्भ होती है। उस समय इसका नाम पिंगल था। वह राजस्थानी साहित्य डिंगल के समान… (68 more words) …

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काव्य का सिद्धांत कवि व उनकी रचनाएं

Poets and their works

Works of the various poets

कवि

रचना

  • सरहपा (सरहपाद)
  • देवसेन
  • स्वयंभू
  • पुष्यदंत
  • धनपाल
  • अब्दुर्रहमान
  • जिनिदत्त सूरी
  • जोइन्दु
  • रामसिंह
  • हेमचन्द्र
  • विद्यापति

  • मुक्तक, रचनाएं
  • श्रावकाचार
  • पउमचरिउ, रिट्‌ठेणेमि चरिउ व स्वयंभू छंद
  • महापुराण, जसहर चरिउ
  • भविसयत्तकहा
  • संदेश रासक
  • उपदेश रसायन रास
  • परमात्म प्रकाश व योगसार
  • पाहुड़ दोहा
  • शब्दानुशासन
  • कीर्तिलता, कीर्तिपताका

आधुनिक काल में ब्रजभाषा काव्य

  • आधुनिक काल में भारतेन्दु युग में ब्रजभाषा की काव्य-भाषा के पद पर प्रतिष्ठा रही है। भारतेंन्दु बाबु हरिश्चद्र, बाबु जगन्नाथ दास रत्नाकार, सत्यनारायण ’कविरत्न’ आदि आधुनिक काल के ब्रजभाषा के सशक्त कवि हैं।
  • दव्वेदी युग में आकर कविता ने नई करवट बदली और काव्यभाषा के रूप में खड़ी बोली को प्रतिष्ठित कर दिया गया, अत: ब्रजभाषा में हुई काव्य रचना अब भी कवि-सम्मेलनों में सुनी जा सकती है। अपनी मधुरता के कारण यह भाषा सैकड़ों वर्षों तक काव्यभाषा के पद पर सुशोभित रही है।
  • उपयुक्त विवेचन से स्पष्ट है कि शौरसेनी अपभ्रंश से उद्भूत ब्रजभाषा धीरे-धीरे मध्यकाल में आकर व्यापक… (20 more words) …

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