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काव्यभाषा के रूप में अवधी का उदय और विकास

  • समय के साथ अवधी का उत्तर प्रदेश, लखनऊ, फैजाबाद, रायबरेली, प्रतापगढ़, उन्नाव, सीतापुर, सीरी, गोंडा, बाराबंकी आदि जिलों में प्रचार-प्रसार हो गया था। किन्तु आगे जाकर अवधी ब्रजभाषा के साथ प्रतिद्धदंता से पिछड़ गया हैं। अवधी पूर्वी हिन्दी के अन्तर्गत आने वाली प्रमुख बोली है अत: अवधी का विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ हैं। अवधी के लिए दो अन्य नाम कोसली, बेसवाड़ी भी है। किन्तु अवधी ही एक प्रचलित भाषा हैं।
  • अवधी भाषा का अविर्भाव काल दसवीं सदी माना जा सकता हैं, किन्तु अवधी में रचित साहित्यिक रूप के सर्वप्रथम दर्शन आख्यानक कवियों की प्रेमगाथा में होते हैं। प्रस्तुत कवियों… (266 more words) …

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रीतिकाल में ब्रजभाषा काव्य

हिन्दी साहित्य का यह युग मुख्यत: रसालंकाप्रिय कवियों का युग था। इन कवियों के दो वर्ग थे-

1 रीतिबद्ध कवि, जैसे -देव, बिहारी दास, सेनापति, मतिराम और पद्माकर

प्रस्तुत युग के बहुत-से कवि ब्रजभूमि से पूर्व के प्रान्तों के रहने वाले थे। अपनी-अपनी मातृभाषा का प्रभाव उनकी रचनाओं में मिलता है और यह प्रभाव शब्दकोश तक ही सीमित नहीं, क्रियाओं के रूप और वाक्य-गठन तक इससे प्रभावित हुए। परिणात: भाषा अस्थिर और अव्यवस्थित हो गई।

2 रीतिमुक्त कवि, जैसे-घनानंद, ठाकुर, बोधा आदि। परन्तु उनका उद्देश्य लक्षण-शासन लिखने का कभी नहीं था। उन्होंने अपनी सारी प्रतिभा और काव्यशक्ति उदाहरण देने… (860 more words) …

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