CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-खड़ी बोली (Local Language) Revision (Page 5 of 5)

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समकालीन काव्यभाषा की स्थिति

  • साहित्यिक खड़ी बोली हिन्दी के सौभाग्य से नयी कविता का गीतात्मक रूप-नवनीत-विकसित हुआ है जिसमें भाषा की सरलता भी है, प्रेषणीयता भी और इसलिए रसात्मकता भी हैं। शंभुनाथ सिंह, उमाकांतमालवीय, रमानाथ अवस्थी, श्रीकांत वर्मा, केदारनाथ, नरेश मेहता आदि की कविताएं इसका प्रमाण हैं। इनकी भाषा व्यंग्यात्मक व चुटीली है।
  • और अब एकदम नयी पीढ़ी के कवियों का उदय हो रहा है, जिनका प्रतिनिधित्व बद्रीनारायण, बोधिसत्व और विशेषत: धूमिल कर रहे हैं जो हिन्दी की अपार क्षमता का उपयोग करने की आशा दिला सकते हैं। ये लोग

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