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राज्यवार बोलियों की विद्यमानता

  • उत्तरपद्रेश - कौरवी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली अवधी, भोजपुरी, गढ़वाली और कुंमाऊनी।
  • हरियाणा- हरयाणवी, अत्यंत गौण स्थिति में बांगडू
  • राजस्थान-मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती व मालवी।
  • मध्यप्रदेश- बघेली, नीमाड़ी, मालवी, उत्तरपूर्वी जिलों में थोड़े से भू-भाग में ब्रजभाषा और बुंदेली तथा अत्यंत गौण स्थिति में भीली
  • बिहार- भोजपुरी, मगही व मैथिली। गौण बोलियों में अंगिका और वज्जिका।

Hindi UpBahasa, Boli and its area

Hindi UpBahasa, Boli and its area

हिन्दी

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समकालीन काव्यभाषा की स्थिति

  • साहित्यिक खड़ी बोली हिन्दी के सौभाग्य से नयी कविता का गीतात्मक रूप-नवनीत-विकसित हुआ है जिसमें भाषा की सरलता भी है, प्रेषणीयता भी और इसलिए रसात्मकता भी हैं। शंभुनाथ सिंह, उमाकांतमालवीय, रमानाथ अवस्थी, श्रीकांत वर्मा, केदारनाथ, नरेश मेहता आदि की कविताएं इसका प्रमाण हैं। इनकी भाषा व्यंग्यात्मक व चुटीली है।
  • और अब एकदम नयी पीढ़ी के कवियों का उदय हो रहा है, जिनका प्रतिनिधित्व बद्रीनारायण, बोधिसत्व और विशेषत: धूमिल कर रहे
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