CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-खड़ी बोली (Local Language) Revision (Page 2 of 5)

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राज्यवार बोलियों की विद्यमानता

  • उत्तरपद्रेश - कौरवी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली अवधी, भोजपुरी, गढ़वाली और कुंमाऊनी।
  • हरियाणा- हरयाणवी, अत्यंत गौण स्थिति में बांगडू
  • राजस्थान-मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती व मालवी।
  • मध्यप्रदेश- बघेली, नीमाड़ी, मालवी, उत्तरपूर्वी जिलों में थोड़े से भू-भाग में ब्रजभाषा और बुंदेली तथा अत्यंत गौण स्थिति में भीली
  • बिहार- भोजपुरी, मगही व मैथिली। गौण बोलियों में अंगिका और वज्जिका।

Hindi UpBahasa, Boli and its area

Hindi UpBahasa, Boli and its area

हिन्दी की उपभाषाएँ, बोलियाँ तथा उनके क्षेत्र

पश्चिमी हिन्दी

बुंदेली

कन्नौजी

ब्रजभाषा

खड़ी बोली

बँागरू (हरियाणा)

उत्तर प्रदेश (मध्य प्रदेश)

कन्नौज (उत्तर प्रदेश)

मथुरा, आगरा (उत्तर प्रदेश)

रोहतक (हरियाणा)

पूर्वी हिन्दी

अवधी

बघेली

छत्तीसगढ़

लखनऊ, फैजाबाद, (उत्तर प्रदेश)

रीवाँ (मध्य प्रदेश)

रायपुर (छत्तीसगढ़)

बिहारी

भोजपुरी

मगही

मैथिली

बलिया (पूर्वी उत्तर प्रदेश)

गया (बिहार)

दरभंगाा (बिहार)

पहाड़ी हिन्दी

कुल्लई (मँडियाली)

गड़वाली

कुमाऊँनी

कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)

टिहरी गढ़वाल (उत्तरांचल)

अल्मोड़ा, नैनीताल (उत्तरांचल)

राजस्थानी

जयपुरी

निमाड़ी

मालवी

मारवाड़ी

जयपुर (राजस्थान)

खँडवा (मध्य प्रदेश)

उज्जैन (मध्य प्रदेश)

जोधपुर, बीकानेर (राजस्थान)

भीली

राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा गुजरात का सीमावर्ती क्षेत्र

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साहित्यिक हिन्दी के रूप में खड़ी बोली का विकास

  • हिन्दी का संकुचित, मानक या परितिष्ठित अर्थ ग्रहण करने पर हिन्दी का मूल आधार खड़ी बोली है। खड़ी बोली पर आधारित यह हिन्दी ही हमारी राजभाषा है। यही शिक्षा का माध्यम है तथा हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं की भाषा है। वस्तुत: मानक हिन्दी का अभिप्राय इसी खड़ी बोली हिन्दी से लिया जाता है।
  • मुसलमान शासकों के प्रभाव से खड़ी बोली ही हिन्दी के नाम से प्रयुक्त हुई है। 14 वीं सदी में अमीर खुसरों ने सर्वप्रथम हिन्दी भाषा में काव्य-रचना की खुसरों दव्ारा रचित मुकरियां तथा पहेलियां खड़ी बोली में हैं, परन्तु उस काल

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