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हिन्दी बोलियां

हिन्दी भाषा की कतिपय पुस्तकों में बोली को उपभाषा कह दिया गया है। उपभाषाएं निम्नलिखित हैं-

1 राजस्थानी उपभाषा

  • मारवाड़ी-इसमें राजस्थानी उपभाषा का अधिकांश साहित्य मिलता है। यह राजस्थानी की प्रमुख बोली है। इस बोली का क्षेत्र जोधपुर, अजमेर, किशनगढ़, मेवाड़, जैसलमेर व बीकानेर के मध्य अव्यस्थित है।
  • मेवाती- इसे उत्तरी राजस्थानी भी कहा जाता है। यह बोली राजस्थान के मेवात क्षेत्र में बोली जाती है।
  • जयपुरी- यह बोली जयपुर व अजमेर में बोली जाती है। इस बोली का नाम ढूढाणी भी है।
  • मालवी- यह मालवा क्षेत्र की बोली है तथा इन्दौर, उज्जैन, देवास, रतलाम तथा भोपाल… (430 more words) …

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बीसवीं सदी में साहित्यिक खड़ी बोली

  • खड़ी बोली और हिन्दी साहित्य के सौभाग्य से 1903 ई. में अचार्य महावीर प्रसाद दव्वेदी ने ’सरस्वती’ पत्रिका के संपादकत्व का भार संभाला। किसी विवाद में न पड़कर वे साहित्य-रचना में लीन हुए थे वे सरल और शुद्ध भाषा के प्रयोग पर बल देते थे साथ ही तद्भव शब्दों के पक्षपाती थे, परन्तु विषय और भाव के अनुसार संस्कृत या उर्दू के शब्दों का व्यवहार भी चाहते थे। वे लेखकों की वर्तनी अथवा व्याकरण संबंधी त्रुटियों का संशोधन स्वयं करते थे। मैथिलीशरण गुप्त, रामचरित उपध्याय, लोचनप्रसाद पाण्डेय आदि उनके दव्ारा उत्साहित होकर इस उपक्रम में सम्मिलित हुए थे। कई अन्य… (178 more words) …

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