CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-अप्रभंश अवहट्ट सहित भाषा (Including Language Aprbnsh Avhtt) Revision (Page 4 of 5)

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अप्रभंश (अवहट्ट सहित) और पुरानी हिन्दी का संबंध

  • ज्यों-ज्यों काव्य भाषा देश भाषा की ओर अधिक प्रवृत्त होती गई, त्यों-त्यों तत्सम्‌ संस्कृत शब्द रखने में संकोच छटता गया। शारंगधर के पद्यों और विद्यापति के ग्रंथ कीर्तिलता में इसका प्रमाण मिलता है।
  • अपभ्रंश भाषाओं से हिन्दी भारतीय भाषाओं का उदय हुआ। अपभ्रंश और आधुनिक भारतीय भाषाओं के उदय के बीच एक ऐसी भाषा का प्रयोग हो रहा था जब अपभ्रंश क्रमश: आधुनिक भाषाओं का रूप ग्रहण करने लगी थी। भाषा का यह रूप अवहट्ट कहलाया ’चन्दबरदायरी के पृथ्वीराज रासों’ में अवहट्ट के सबसे पहले दर्शन होते हैं तथा व

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अपभ्रंश व पुरानी हिन्दी में अंतर

स्वर थे-

  • अपभ्रंश में पाए जाने वाले स्वर-
  1. हस्व-अ, इ, उ, एं, औ
  2. दीर्घ-आ, ई, ऊ, ए, ओ
  3. ऐ औ नहीं मिलते
  4. आरम्भिक हिन्दी में निम्नलिखित स्वर हैं
  5. अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, एं, ऐ, ऑ, ओ, औ
  6. इनमें हस्व-अ, इ, उ, एं, औ हैं और दीर्घ-आ, ई, ऊ, ए, ओ हैं।
  • च, छ, ज, आदि अपभ्रंश में स्पर्श व्यंजन थे, किन्तु हिन्दी में आकर स्पर्श-संघर्षी हो गए है।
  • न, र, ल आदि ध्वनियां अपभ्रंश में दंत्य ध्वनियां थी, जबकि हिन्दी में ये वर्त्स्य ध्वनियां हो गई हैं।
  • अपभ्रंश में ड़, ढ़ ध्वनियां नहीं है, जबकि हिन्दी में इसका प्रयोग होने लग

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