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हिन्दी भाषा और उसका विकास

हिन्दी भाषा का विकास के विषय में जानने के लिए हमें पहले की भाषाओं का संक्षिप्त ज्ञान प्राप्त करना होगा। हिन्दीं की पूर्ववती भाषाएं निम्न हैं-

वैदिक संस्कृत: - वेदों में वैदिक संस्कृत का रूप प्रयुक्त हुआ है। इस भाषा का पुराना रूप ऋग्वेद में देखा जा सकता है। यह वेद चार प्रकार के होते हैं। जो निम्न है।

4 Vedas of Ancient Hindi Literature

4 Vedas of Ancient Hindi Literature

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अपभ्रंश व पुरानी हिन्दी में अंतर

स्वर थे-

  • अपभ्रंश में पाए जाने वाले स्वर-
  1. हस्व-अ, इ, उ, एं, औ
  2. दीर्घ-आ, ई, ऊ, ए, ओ
  3. ऐ औ नहीं मिलते
  4. आरम्भिक हिन्दी में निम्नलिखित स्वर हैं
  5. अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, एं, ऐ, ऑ, ओ, औ
  6. इनमें हस्व-अ, इ, उ, एं, औ हैं और दीर्घ-आ, ई, ऊ, ए, ओ हैं।
  • च, छ, ज, आदि अपभ्रंश में स्पर्श व्यंजन थे, किन्तु हिन्दी में आकर स्पर्श-संघर्षी हो गए है।… (170 more words) …

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