CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-अप्रभंश अवहट्ट सहित भाषा (Including Language Aprbnsh Avhtt) Revision (Page 2 of 5)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

बोलियां

बोलियां- ऐसे तो ’प्राकृत-सर्वस्व’ नामक ग्रंथ में अपभ्रंश भाषा के 27 भेद बताएं गए हैं। किन्तु मुख्य अपभ्रंश केकय, टक्क, ब्राचड़, शौरसेनी, माहराष्ट्री, अर्धमागधी या मागधी मानी जा सकती है। जिनके स्थान वे ही थे जिनका वर्णन प्राकृतों के प्रसंग में हो चुका है। अलग-अलग मत के अनुसार कुछ लोगों के बोलियों के सबंध में अलग -अलग भेद हैं जो निम्न हैं-

  • डॉ. याकोबी ने अपभ्रंश के चार भेद, तगारे ने तीन भेद तथा नामवर सिंह ने दो भेद किए हैं, किन्तु ये भेद साहित्य में प्रयुक्त भाषा के आधार पर किए गए हैं।

… (1531 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

अपभ्रंश की विशेषताएं

अपभ्रंश की विशेषताएं निम्न हैं-

  • ’अ’ का पूर्वी तथ पश्चिमी अपभ्रंशों में संवृत-विवृत का भेद था।
  • ऋ का लिखने में प्रयोग था, किन्तु उसका उच्चारण ’रि’ होता था।
  • श्‌ का प्रचार मात्र मागधी (सम्भवत: पूर्वी मागधी) से था।
  • ल माहाराष्ट्री में तो था ही, साथ ही उड़ीसा में बोली जाने वाली शौरसेनी में भी था। वह भी कहीं-कहीं था।
  • स्वरों का अनुनासिक रूप (ऋ का नहीं) प्रयुक्त होने लगा था।
  • संगीत और स्वर समाप्त हो चुका था बलात्मक स्वर विकसित हो चुका था।
  • अपभ्रंश एक उकार बहुला भाषा थी। यों तो ’ललित विस्तार’ तथा

… (4268 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In