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लक्ष्मण सिंह

  • हालांकि ’इतिहास तिमिरनाशक’ और ’बनारस अखबार’ में राजा शिवप्रसाद जिस भाषा-फारसी-अरबी बहुल भाषा का प्रयोग कर रहे थे उसकी प्रतिक्रिया राजा लक्ष्मण सिंह (1826 - 96) पर हुई। राजा शिवप्रसाद की भाँति उन्हें भी हिन्दी-अंग्रेजी फारसी का अच्छा ज्ञान था। ये भी 20 वर्ष तक सरकारी सेवा में रहे। राजा कि उपाधि उन्हें भी अंग्रेजी सरकार से ही प्राप्त हुई थी। किन्तु हिन्दी के संबंध में उन्होंने राजा शिवप्रसाद के ठीक विरोधी दृष्टिकोण अपनाया। वे शुद्ध हिन्दी के पक्षपाती थे। उन्होंने 1862 में अभिज्ञान शाकुन्तलम्‌ का अनुवाद विशुद्ध हिन्दी में किया हैं। मेघदूत और रघुवंश के अनुवाद भी उन्होंने किये।… (149 more words) …

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मैकाल

सन्‌ 1834 में जब मैकाले भारत पहँुचा तो प्राचीन शिक्षा के विरोधियों को काफी बल मिला। मैकाले संस्कृत महाविद्यालय और अरबी-फारसी मदरसों के विरुद्ध था। उसका सुझाव था कि इनको बंद कर दिया जाय। अंग्रेजी भाषा की प्रशंसा में उसने लिखा-”हमारी भाषा पश्चिमी भाषाओं में सर्वोतम हैं। जिसे इस भाषा का ज्ञान प्राप्त है उसे संसार के अपार ज्ञान भंडार की उपलब्धि हो सकती है। बहुत कुछ संभावना है कि यह पूर्व के समुद्रों की वाणिज्य भाषा बन जाए।” लार्ड बेन्टिक के मैकाले का प्रतिवेदन स्वीकार कर लिया। संस्कृत और अरबी-फारसी को दिए जाने वाले अनुदान तो बंद नहीं किए… (46 more words) …

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