CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-हिन्दी प्रसार आंदोलन (Hindi Spreading Movement) Revision (Page 8 of 20)

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इंशाअल्ला खाँ

  • दूसरे लेखक हैं जिन्होंने हिन्दी-गद्य निर्माण में विशेष योग दिया है। उन्होंने ’उदयभानचरित’ या ’रानी केतकी’ की कहानी कदाचित्‌ 1800 - 1808 ई. के बीच लिखी होगी। वे लल्लुलाल और सदल मिश्र के समसामयिक थे। पर रानी केतकी की कहानी लाल और मिश्र की रचनाओं से पहले लिखी जा चुकी थी।
  • इंशा के पूर्वज समरकंद से आकर कश्मीर में बस गए। इसके बाद वे लोग दिल्ली आ बसे। उनके पिता माशाअल्लाह जो मुगल दरबार में हकीम थे, मुगल-साम्राज्य के क्षीण होने पर मुर्शिदाबाद चले गए। इंशा का जन्म दिल्ली में हुआ। इंशा लड़कपन स

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लल्लूलाल

फोर्ट विलियम महाविद्यालय के भाषा-मुंशी लल्लूलाल (1763 - 1835 ई. ) और सदल मिश्र ने क्रमश: ’प्रेमसागर’ पाठ्‌यपुस्तकें लिखी। लल्लूलाल आगरे के रहने वाले थे। जीविका की खोज में वे सन्‌ 1786 ई. में मुर्शिदाबाद पहुँचे और मुबारकउद्दौला के सम्पर्क में आए। थोड़े दिनों तक वे नागौर नरेश रामकृष्ण के आश्रय में कलकत्ते में भी रहे। राजा रामकृष्ण के कैद हो जाने पर वे कलकत्ते लौट आए। कलकत्ता में उन्होंने एक प्रेस भी खोला। गिलक्रिस्ट के संपर्क में आने पर सन्‌ 1800 में फोर्ट विलियम महाविद्यालय में वे गद्य

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