CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-हिन्दी प्रसार आंदोलन (Hindi Spreading Movement) Revision (Page 7 of 20)

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फोर्ट विलियम की हिन्दी

  • प्रशासनिक सुविधा के लिए 1799 ई. में अंग्रेजों ने कलकत्ते में फोर्ट विलियम महाविद्यालय की स्थापना की थी। इस महाविद्यालय में साहित्य और विज्ञान दोनों की शिक्षा का आयोजन किया गया। साहित्य में एक ओर तो शास्त्रीय भाषा साहित्य-अरबी, फारसी, संस्कृत-की शिक्षा दी जाने लगी और दूसरी ओर देशभाषा हिन्दुस्तानी, बंगला, तेलगू, मराठी, तमिल आदि में पुस्तकों का लिखा जाना आरम्भ हुआ। इसके अलावा प्रकृति विज्ञान, वनस्पतिशास्त्र, रसायनशास्त्र की शिक्षा की भी व्यवस्था हुई। सन्‌ 1800 में गिलक्रिस्ट हिन्दुसतानी

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सदासुखराय

लाला भगवानदीन और रामदास गौड़ ने हिन्दी भाषा सार पुस्तक का संपादन किया है। उसमें मुंशी सदासुखराय का सुरासुरनिर्णय लेख और उसके वार्तिक का एक अंश संगृहीत किया गया है। संपादकों ने सुरासुरनिर्णय का रचनाकाल सं. 1839 - 40 (1783 ई. ) ठहराया हैं। उन्होंने सुखसागर नाम का कोई ग्रंथ नहीं लिखा। हिन्दी में उनका उपनाम सुखसागर था और उर्दू-फारसी में निसार। जिस ग्रंथ के आधार पर शुक्ल जी ने उनकी भाषा के सबंध में यह निष्कर्ष निकाला है वह प्रमाणिक नहीं है। सदासुख नाम के जीन व्यक्तियों का उल्लेख मिलता है-

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