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स्वराज्य आंदोलन का प्रभाव

बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर भारत में नए धार्मिक आंदोलनों के विरुद्ध पुनरुत्थानवादी प्रतिक्रियाएँ आरम्भ हुईं। बंगाल में राधाकांत देव ने राजा राममहोन राय के ब्रह्यसमाज के विरोध में धर्म सभा (1830 ई. ) की स्थापना की थी। पर 1957 तक वह समाज का प्रभाव कम नहीं कर सकी। किन्तु 1957 के विद्रोह के बाद सुधारवादी रेडिकल्स का जोर कम हो गया और पुरातनवादी मनोवृत्तियाँ उभरकर सामने आई। सन्‌ 1858 के अनंतर बंगाल में दो प्रवृत्तियों का अधिक जोर था- जो निम्न हैं-

  1. राष्ट्रीयतावादी विदेशी सत्ता के विरुद्ध आक्रोश
  2. गांव की बढ़ती हुई गरीबी के प्रति सहानुभूति, स्वतंत्रता और समानता के… (658 more words) …

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हिन्दी भाषा -प्रयोग के विविध रूप

बोली

  • किसी सीमित क्षेत्र में बोला जाने वाला भाषा का स्थानीय रूप ’बोली’ कहलाता है। पांच मील की दूरी पर ही बोली में थोड़ा सा परिवर्तन आ जाता है यद्यिपि उसके साम्राराज्य रूप में किसी प्रकार का बदलाव नहीं होता है। बोली में साहित्य रचना नहीं होती है। न ही सरकारी काम-काज में उसका प्रयोग किया जाता है।
  • शब्दार्थ की दृष्टि से ’हिन्दी शब्द का प्रयोग’ भारत में या अन्य वे देश व क्षेत्र जहाँ भाषा के रूप में इसका प्रयोग होता हैं। चाहे वह किसी भी आर्य अथवा द्रविड़ अथवा अन्य परिवार कि भाषा के लिए हो सकता है,… (58 more words) …

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