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पश्चिमीकरण की प्रक्रिया

  • नए अर्थ-तंत्र शिक्षा-प्रणाली, संचार-जाल आदि के कारण पश्चिमीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ होता हैं। बहुत से लोग इसे पश्चिमीकरण न कह कर आधुनिकीकरण कहते हैं। पश्चिमीकरण शब्द का प्रयोग बहुत संगत नहीं हैं। क्योंकि स्वयं पश्चिम को बहुत सी बातें पूर्व से मालूम हुई हैं, जैसे मुद्रण-यंत्र का आविष्कार सबसे पहले चीन देश में हुआ। एम. एन. श्रीनिवास ने ’आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन पुस्तक में लिखा हैं- ”भारतीयों को केवल स्याही सोख का दर्जा देना तो स्पष्ट ही वाहियात है। यह कहना ठीक नहीं कि जिस किसी बात के संपर्क में वे आए वह सब उन्होंने आत्मसात्‌ किया उसे… (315 more words) …

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नागरी प्रचारिणी सभा, बनारस (काशी)

  • सन्‌ 1896 में नागरी प्रचारिणी पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुआ। इसके इसके संस्थापक श्री वेणी प्रसाद थे। बाबु श्यामसुंदर दास पं. सत्यनारायण मिश्र और ठाकुर शिवदान सिंह के प्रयत्नों के फलस्वरूप 16 जुलाई, 1897 को काशी में ’नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई। इसके कार्यकत्ताओं के प्रयास से 1898 ई. में कचहरियों में नागरी का प्रवेश हुआ और आवेदन-पत्र सम्मन आदि हिन्दी में लिखे जाने लगे। आर्य भाषा पुस्तकालय की स्थापना की गई इसमें विभिन्न भाषा-भाषाओं की पुस्तकें तथा पाण्डुलिपियाँ संगृहित हैं जिनकी संख्या 50 हजार के लगभग है। वाचनालय में लगभग 250 पत्रिकाएँ आती हैं। सन्‌ 1945 में पं.… (143 more words) …

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