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हिंदुस्तानी पाठशाला

जिसने हिंदी प्रचार-प्रसार हेतु विशेष कार्य किया। अकादमी की ओर से श्रेष्ठ लेखन की ओर विशेष ध्यान दिया गया। एकडेमी दव्ारा श्रेष्ठ विदव्ानों के व्याख्यानों का आयोजन किया गया और श्रेष्ठ लेखकों का पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहन दिया गया। इसकी ओर से छात्रों का छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक संस्थाएँ एवं कार्यकर्ता भी विभिन्न नामों से हिंदी प्रसार में संलग्न रहे है। उनमें राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा का नाम उल्लेखनीय है।

पत्र-पत्रिकाएं

आधुनिक युग में मुद्रण यंत्र के आविष्कार के साथ प्रचार सुविधाओं में तीव्रता आ गई है। भारतेन्द्र पूर्व काल में अनेक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन होने लगा था। इन पत्र-पत्रिकाओं ने खड़ी बोली के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हिन्दी में पहला पत्र उदन्त मार्तण्ड है जो 30 मई 1826 को जुगलकिशोर सुकुल के संपादकत्त्व में प्रकाशित हुआ। 1854 में कलकत्ता में ’समाचार सुधा वर्षण’ नाम का दैनिक पत्र प्रकाशित हुआ था। पंजाब से नवीनचंद्र राय न ’ज्ञान प्रकाशिनी’ पत्रिका निकाली। हिंदी को जिनका सहारा और सहयोग मिला उनमें निम्नलिखित पत्र-पत्रिकाओं का विशेष स्थान है-

  • कोलकत्ता में हिंदी-दीप्ति प्रकाश तथा प्रेम… (348 more words) …

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