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  • सन्‌ 1835 में कंपनी सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। पर अदालती भाषा के संबंध में 1836 ई. में जो विज्ञापन निकला उसमें अदालतों में देशी भाषा के प्रयोग का निर्देश दिया गया है। अभी तक हिन्दी प्रदेशों की अदालती भाषा फारसी ही थी, पर जनता की सुविधा तथा अंग्रेजी शासन को दृढ़ बनाने की दृष्टि से अदालतों की भाषा देशी कर दी गई पर
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चेम्बरलेन

केरे के बाद चेम्बरलेन ने भी हिन्दी की अपनी प्रकृति को समझने की कोशिश की। उसने हिन्दी की विभिन्न शैलियों -चलती हिन्दुस्तानी, चलती नागरी, संस्कृतनिष्ठ हिन्दुस्तानी, ग्राम्य शब्द-बहुल हिन्दी को वह हिन्दवी कहता था। मतलब यह कि चेम्बरलेन ने भी उर्दू को हिन्दी की एक शैली ही माना है।

सदल मिश्र

फोर्ट विलियम महाविद्यालय दूसरे भाषा-मुंशी सदल मिश्र (जन्म अनुमानत: 1768, मृत्यु 1848 ई. ) शाहाबाद जिले के घुवडीडा गाँव के निवासी थे। प्रस्तुत महाविद्यालय के तत्त्वाधान में सन्‌ (1800 ई. ) नासिकेतोप्राख्यान, व 1803 में उन्होंने ’चंद्रावती अथवा नासिकेतोप्राख्यान’ को संस्कृत से खड़ीबोली में अनुवाद किया। प्रस्तुत कवि की तीन कृतियां प्रमुख हैं, नासिकेतोप्राख्यान, 1806 में अध्यात्म ’रामायण और रामचरित’ अथवा अध्यात्म रामायण नामक प्रस्तुत तीनों कृतियां का उन्होंने संस्कृत

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