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सदासुखराय

लाला भगवानदीन और रामदास गौड़ ने हिन्दी भाषा सार पुस्तक का संपादन किया है। उसमें मुंशी सदासुखराय का सुरासुरनिर्णय लेख और उसके वार्तिक का एक अंश संगृहीत किया गया है। संपादकों ने सुरासुरनिर्णय का रचनाकाल सं. 1839 - 40 (1783 ई. ) ठहराया हैं। उन्होंने सुखसागर नाम का कोई ग्रंथ नहीं लिखा। हिन्दी में उनका उपनाम सुखसागर था और उर्दू-फारसी में निसार। जिस ग्रंथ के आधार पर शुक्ल जी ने उनकी भाषा के सबंध में यह निष्कर्ष निकाला है वह प्रमाणिक नहीं है। सदासुख नाम के जीन व्यक्तियों का उल्लेख मिलता है- वे निम्न हैं-

  • एक मुंतखबुत्तवारीख के लेखक सदासुखराय… (50 more words) …

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हुगली और श्रीरामपुर

  • श्रीरामपुर मिशन के केरे पंचानन कर्मकार की सहायता से टाइप फाउण्ड्री खोली। वस्तुत: नागरी छापे का जन्मस्थान हुगली और श्रीरामपुर है। श्रीरामपुर में पहले पहल छापे का कारखाना बना। यहाँ से ही अन्य स्थानों के छापे भेजे जाते थे। टाइप उपलब्ध होने से जगह-जगह छापेखानों का खोलना आरंभ हो गया था। छापेखाने के कारण पुस्तकें और समाचार पत्रों के प्रकाशन का दव्ार खुल गया।
  • सन्‌ 1780 में जे. ए. हिकी ने अंग्रेजी में ’दि बंगाल गजट’ प्रकाशित किया। गजट भारतीय पत्र जगत्‌ में नया प्रकाश लेकर आया। इसके बाद अंग्रेजी के और भी पत्र प्रकाशित हुए। सन्‌ 1818 में मार्शमैन… (288 more words) …

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