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पुस्तक प्रकाशन

  • 20वीं शताब्दी के आरंभ में हिन्दी गद्य की प्रतिष्ठा हुई। उसका यथेष्ठ लाभ ईसाई धर्म प्रचारकों ने उठाया। शिक्षा संबंधी पुस्तकों को प्रकाशित करने के लिए आगरा में ’विद्यालय पुस्तक समाज की स्थापना हुई। इसके लिए पं. आंेकार भटट ने भूगोल सार और पं. बदरीनाथ शर्मा ने रसायन प्रकाश लिखा। इसी प्रकार के समाल की ओर से कोलकत्ता से पदार्थ विद्यासागर आदि अनेक वैज्ञानिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ। इलाहाबाद मिशन प्रेस की ओर ’आजमगढ़ रीडर’ नामक एक पाठ्‌य पुस्तक भी प्रकाशित हुई।
  • इसी प्रकार आगे शिक्षा संबंधी कई पुस्तके ’आरफन प्रेस (छापाखाना) मीर्जापुर दव्ारा प्रकाशित की गई इससे स्पष्ट है… (39 more words) …

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हिन्दी प्रसार के आंदोलन

  • ब्रिटिश काल में हुए अधिकतर आंदोलन भारतीय समाज की रूढ़ियों पर प्रहार करने के लिए हुए थे। लेकिन सभी आंदोलन के प्रणेता इस विषय पर एकमत थे कि समाज की उन्नति शिक्षा से संभव है और शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भाषा का अधिक से अधिक प्रसार हो। लिहाजा ब्रिटिश काल में शुरू हुई भाषा की संरचना ने इसी काल के अंत तक आधुनिक रूप ले लिया। इससे भाषाओं और बोलियों में हिंदी का सर्वाधिक समृद्ध रूप निखरकर सामने आया हैं।
  • आधुनिक हिन्दी भाषा एक समृद्ध भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हैं, उसमें प्रचुर मात्रा में साहित्य-लेख का… (238 more words) …

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