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रामकृष्ण मिशन

रामकृष्ण परमहंस के संबंध में कहा जाता है कि इस गरीब, अनपढ़ गंवार, रोगी, अर्धमूर्तिपूजक, मित्रहीन, हिन्दू भक्त ने बंगाल को बुरी तरह हिला दिया था। उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद ने उन्हें बाहर से भक्त और भीतर से ज्ञानी कहा है। रामृष्ण परमहंस के देहावासान के बाद विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

सन्‌ 1893 में विश्व-धर्म संसद् में सम्मिलित होने के लिए वे शिकागो गए। उनकी भाषण से प्रभावित हो कर न्यूयार्क हैराल्ड ट्रिब्यून ने लिखा था-”विश्वधर्म संसद् में विवेकानंद सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति थे। उनको सुनने के बाद ऐसा लगता है कि उस महान देश में धार्मिक मिशनों को… (277 more words) …

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प्रचार-प्रसार

  • राष्ट्रभाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान देने वालों में पंडित मदन माहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपतराय, राजा राममोहन, महात्मा गांधी, राजेन्दं प्रसाद, काका कालेलकर, पुरुषोत्तम दास टंडन, सेठ गोविन्ददास का नाम लिया जा सकता है। इन सभी नेताओं ने हिन्दी को जनता के संपर्क का माध्यम बनाया तथा अपने भाषण हिन्दी में दिए। महात्मा गांधी का मत है कि हिन्दी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है, क्योंकि यह जन-जन की भाषा है। गांधी जी की प्रेरणा से 1925 के कानपुर कांग्रेस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि कांग्रेस अपने समस्त कार्यकलाप हिन्दी भाषा में करेगी। गांधी… (170 more words) …

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