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ब्रह्यसमाज

आधुनिक भारत की नींव का पहले राजा राममोहन राय ने रखी। उन्होंने (1722 - 1833) सन्‌ 1828 में ब्रह्यसमाज की स्थापना की थी। अरबी और फारसी का उन्हें बहुत अधिक ज्ञान था। अरबी अनुवाद के दव्ारा वे अफलातुन, अरस्तु आदि प्राचीन यूनानी विचारकों से परिचित हुए। बनारस जाकर कुछ वर्षों तक गीता, उपनिषद् आदि का भी गहन अध्ययन किया था। राममोहन राय की विचार धारा पर इस्लामी एकेश्वरवाद का भी स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। ईसाई धर्म से भी वे प्रभावित थे। यह समस्त विचारधाराएं उन्हें पुराने औपनिषदिक दर्शन में मिल गई है। विशेषरूप से तैत्तिरीय और कोषीतकी में।… (530 more words) …

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केरे

केरे को गिलक्रिस्ट की हिन्दुस्तानी कृत्रिम प्रतीत हुई। अत: धर्म प्रचार की दृष्टि से उसने इसे उपयोगी नहीं समझा। वे यहाँ आने के पहले कामचलाऊ हिन्दी सीख चुके थे। दो मुन्शियों की सहायता से किया गया बाइबिल का हिन्दी अनुवाद सन्‌ 1811 में छपा। यह बाइबिल का पहला हिन्दी अनुवाद है। सबसे पहले केरे ने हिन्दी की प्रकृति को अलग किया। अपने अनुवाद के चौथे संस्करण में उसका कहना है ”हम हिन्दुस्तानी की उस बोली को हिन्दुई या हिन्दी समझते हैं जो मुख्यत: संस्कृत से बनी है और जो मुसलमानों के आने के पूर्व सम्पूर्ण हिन्दुस्तान में बोली जाती थी।… (16 more words) …

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