CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी भाषा और उसका विकास और साहित्य (Hindi & Its Development)-हिन्दी प्रसार आंदोलन (Hindi Spreading Movement) Revision (Page 10 of 20)

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चेम्बरलेन

केरे के बाद चेम्बरलेन ने भी हिन्दी की अपनी प्रकृति को समझने की कोशिश की। उसने हिन्दी की विभिन्न शैलियों -चलती हिन्दुस्तानी, चलती नागरी, संस्कृतनिष्ठ हिन्दुस्तानी, ग्राम्य शब्द-बहुल हिन्दी को वह हिन्दवी कहता था। मतलब यह कि चेम्बरलेन ने भी उर्दू को हिन्दी की एक शैली ही माना है।

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पत्र-पत्रिकाएं

आधुनिक युग में मुद्रण यंत्र के आविष्कार के साथ प्रचार सुविधाओं में तीव्रता आ गई है। भारतेन्द्र पूर्व काल में अनेक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन होने लगा था। इन पत्र-पत्रिकाओं ने खड़ी बोली के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हिन्दी में पहला पत्र उदन्त मार्तण्ड है जो 30 मई 1826 को जुगलकिशोर सुकुल के संपादकत्त्व में प्रकाशित हुआ। 1854 में कलकत्ता में ’समाचार सुधा वर्षण’ नाम का दैनिक पत्र प्रकाशित हुआ था। पंजाब से नवीनचंद्र राय न ’ज्ञान प्रकाशिनी’ पत्रिका निकाली। हिंदी को जिनका सहारा

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हुगली और श्रीरामपुर

  • श्रीरामपुर मिशन के केरे पंचानन कर्मकार की सहायता से टाइप फाउण्ड्री खोली। वस्तुत: नागरी छापे का जन्मस्थान हुगली और श्रीरामपुर है। श्रीरामपुर में पहले पहल छापे का कारखाना बना। यहाँ से ही अन्य स्थानों के छापे भेजे जाते थे। टाइप उपलब्ध होने से जगह-जगह छापेखानों का खोलना आरंभ हो गया था। छापेखाने के कारण पुस्तकें और समाचार पत्रों के प्रकाशन का दव्ार खुल गया।
  • सन्‌ 1780 में जे. ए. हिकी ने अंग्रेजी में ’दि बंगाल गजट’ प्रकाशित किया। गजट भारतीय पत्र जगत्‌ में नया प्रकाश लेकर आया। इसके बाद अंग्

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