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इंशाअल्ला खाँ

  • दूसरे लेखक हैं जिन्होंने हिन्दी-गद्य निर्माण में विशेष योग दिया है। उन्होंने ’उदयभानचरित’ या ’रानी केतकी’ की कहानी कदाचित्‌ 1800 - 1808 ई. के बीच लिखी होगी। वे लल्लुलाल और सदल मिश्र के समसामयिक थे। पर रानी केतकी की कहानी लाल और मिश्र की रचनाओं से पहले लिखी जा चुकी थी।
  • इंशा के पूर्वज समरकंद से आकर कश्मीर में बस गए। इसके बाद वे लोग दिल्ली आ बसे। उनके पिता माशाअल्लाह जो मुगल दरबार में हकीम थे, मुगल-साम्राज्य के क्षीण होने पर मुर्शिदाबाद चले गए। इंशा का जन्म दिल्ली में हुआ। इंशा लड़कपन से ही कविता करते थे। मुर्शिदाबाद के… (430 more words) …

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हिन्दी साहित्य सम्मेलन

प्रयाग (इलाहाबाद) - नागरी प्रचारिणी सभा, काशी की प्रेरणा से सन्‌ 1910 मेें हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की स्थापना हुई है। विविध परीक्षाएँ आयोजित करके एवं उपाधियों देकर हिन्दी साहित्य को प्रोत्साहन प्रदान करना इसका मुख्य कार्य रही है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग ने श्रेष्ठ लेखन के प्रोत्साहन हेतु कई पुरस्कार स्थापित किए हैं। सम्मेलन की परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के बाद विद्यार्थियों को विशारद, साहित्य-रत्न की उपाधियाँ दी जाती थीं।

हिन्दुस्तान अकादमी प्रयाग (इलाहाबाद): - सन्‌ 1927 में इलाहाबाद में इस संस्था की स्थापना हुई। इसके प्रमुख कार्य है- साहित्यिक विषयों पर विदव्ानों के भाषण करना, श्रेष्ठ रचनाओं को… (322 more words) …

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