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प्रेमचंदोत्तर काल 1936 से बाद तक

  • छायावादोत्तर काल में कविता की भांति ही कहानी एक मुख्य विधा रही है। इसलिए कहानी के क्षेत्र में अनेक वादों का प्रवर्तन होता रहा है। छायावाद के बाद हिन्दी कहानी में दो प्रवृत्तियों मुख्य रूप से दिखाई देती हें।

    पहली प्रवृत्ति यह कि काव्य के क्षेत्र में जिस प्रकार प्रगतिवाद का बोलबाला रहा उसी प्रकार कहानी में प्रगतिवादी जीवन-दृष्टि मुखरित हुई। इस प्रवृत्ति का विकास यशपाल के रूप से हुआ।

  • यशपाल- का नाम हिन्दी के अग्रगण्य कहानीकारों में लिया जाता है। उन पर मार्क्सवादी दर्शन का प्रभाव है। यशपाल यथार्थवादी कहानीकार हैं। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर कठोर प्रहार किया है।… (351 more words) …

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