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अकहानी

अकहानी

  • अकहानी का उदय-वर्ष 1960 तक आते-आते कहानी की तीव्रता खो गई। साठोत्तरी काल में अकहानी का आंदोलन चला। यह आंदोलन पश्चिम के ’एण्टी स्टोरी’ (विपरीत कहानी) आंदोलन से प्रभावित रहा। इस समय के कहानीकारों ने नई कहानी को यांत्रिक अनुभव कहा और यह माना कि इन कहानीकारों का अनुभव दृष्टिहीन है। नई कहानी को स्वीकार न करके अब उन्होंने अकहानी का स्वर ऊंचा किया। अकहानी से उनका मतलब यह है कि इस कहानी में वे सारी विशेषताएँ छोड़ दी गई हैं जो अब तक कहानी में थीं। वैसे तो अकहानी भी कहानी है पर वह अपने से पिछली… (349 more words) …

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मनोवैज्ञानिक कहानी

  • मनोवैज्ञानिक कहानी के एक विशिष्ट स्वरूप को उभारने को श्रेय जैनेन्द्र को हैं जैनेन्द्र ने व्यक्ति मन की जैसी अभिव्यक्ति दी उसको बौद्धिक दृष्टि देने और विकसित करने का कार्य अज्ञेय ने किया है। अज्ञेय में बौद्धिकता, अनुभव की विशिष्टता और भाव-प्रवणता के दर्शन होते हैं एक भिन्न स्तर पर इलाचन्द्र जोशी, भगवती प्रसाद वाजपेयी आदि ने भी मनोवैज्ञानिक कहानियां लिखीं।

प्रगतिवादी कहानी

प्रगतिवादी विचारधार से प्रभावित होकर लिखने वाले अन्य कहानीकारों में मन्मथनाथ गुप्त, रांगेय राघव, भैरवप्रसाद गुप्त, पहाड़ी, नागार्जुन, अमृतराय आदि उल्लेखनीय हैं।

  • रांगेय राघव- ने अपनी कहानियों में जीवन के गहन अनुभवों को व्यक्त किया हैं… (747 more words) …

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