CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी कहानी (Story Hindi) Revision (Page 3 of 5)

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प्रेमचंदोत्तर काल 1936 से बाद तक

  • छायावादोत्तर काल में कविता की भांति ही कहानी एक मुख्य विधा रही है। इसलिए कहानी के क्षेत्र में अनेक वादों का प्रवर्तन होता रहा है। छायावाद के बाद हिन्दी कहानी में दो प्रवृत्तियों मुख्य रूप से दिखाई देती हें।

    पहली प्रवृत्ति यह कि काव्य के क्षेत्र में जिस प्रकार प्रगतिवाद का बोलबाला रहा उसी प्रकार कहानी में प्रगतिवादी जीवन-दृष्टि मुखरित हुई। इस प्रवृत्ति का विकास यशपाल के रूप से हुआ।

  • यशपाल- का नाम हिन्दी के अग्रगण्य कहानीकारों में लिया जाता है। उन पर मार्क्सवादी दर्शन का प्रभाव है। य

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मनोवैज्ञानिक कहानी

  • मनोवैज्ञानिक कहानी के एक विशिष्ट स्वरूप को उभारने को श्रेय जैनेन्द्र को हैं जैनेन्द्र ने व्यक्ति मन की जैसी अभिव्यक्ति दी उसको बौद्धिक दृष्टि देने और विकसित करने का कार्य अज्ञेय ने किया है। अज्ञेय में बौद्धिकता, अनुभव की विशिष्टता और भाव-प्रवणता के दर्शन होते हैं एक भिन्न स्तर पर इलाचन्द्र जोशी, भगवती प्रसाद वाजपेयी आदि ने भी मनोवैज्ञानिक कहानियां लिखीं।

प्रगतिवादी कहानी

प्रगतिवादी विचारधार से प्रभावित होकर लिखने वाले अन्य कहानीकारों में मन्मथनाथ गुप्त, रांगेय राघव, भैरवप्रसाद गुप्त,

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