CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी कहानी (Story Hindi) Revision (Page 2 of 5)

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प्रेमचंद काल 1916 से 1936 तक

  • प्रेमचंद-कहानी साहित्य में प्रेमचंद एक नए युग के सूत्रधार थे। उपन्यासकार की भांति प्रेमचंद महान कहानीकार भी थे। आधुनिक हिन्दी कहानी का आविर्भाव दव्वेदी-युग में हुआ। इसी युग में दो प्रमुख कहानीकारों -प्रसाद और प्रेमचंद ने कहानी लिखना प्रारंभ किया था, किन्तु कृतित्व का विकास परवर्ती युग में ही हुआ, जिसे स्वच्छंतावादी युग कहा जाता है। परिमाण और प्रकार दोनों की दृष्टि से प्रेमचंद इस काल के सर्वप्रमुख कहानीकार ठहरते हैं। प्रेमचंद (1880 - 1936) पहले उर्दू में लिखते थे, 1907 में उनके दव्ारा

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प्रेमचंद युगीन कहानी साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ

  • प्रेमचंद युग कहानी कला के उत्कर्ष का काल है। जैनेन्द्र, जयशंकर प्रसाद, सुदर्शन, विश्वंभरनाथ शर्मा कौशिक, अज्ञेय, जोशी, यशपाल, आदि प्रेमचंद युगीन कहानीकारों की कोटि में आते हैं।
  • प्रेमचंद युगीन कहानीकारों में कहानी की रचना समाज को ध्यान मेें रखकर की है। यानी कहानी का संबंध समाज से जोड़ा गया हैं।
  • इस काल के कहानीकारों ने महात्मा गांधी के प्रभाव से प्रभावित होकर सत्य अहिंसा, मानव प्रेम, स्वदेश प्रेम आदि के भावों को अपनी कहानी का विषय बनाकर युगीन परिवेश को उजागर किया है।
  • दलित, शोषित और सर्व

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