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पूर्व प्रेमचंद काल वर्ष 1900 से 1927 तक

  • हिन्दी में कहानी का उद्भव कुछ विलम्ब से हुआ है। भारतेन्दु युग मेें कहानी के नाम पर जो कुछ लिखा गया उसमें कोई विशेषता नहीं है और न उसे कहानी के नाम से अभिहित किया जा सकता है। कहानी का उद्भव दव्वेदी-युग में ही होता है। एक प्रकार से ’सरस्वती’ पत्रिका के प्रकाशन (1900) के साथ कहानी के आविर्भाव को जोड़ा जा सकता है।

  • प्रेमचंद की कहानियाँ- किशोरीलाल गोस्वामी ने ’इन्दुमती’ (1900), माधव प्रसाद मिश्र ने ’मन की चंचलता (1900), लाला भगवानदीन ने ’प्लेग की चुडैली’ (1902), रामचन्द्र शुक्ल की ’ग्यारह वर्षो का सपना’ (1903), बंग महिला की ’दुलाई… (102 more words) …

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प्रेमचंद काल 1916 से 1936 तक

  • प्रेमचंद-कहानी साहित्य में प्रेमचंद एक नए युग के सूत्रधार थे। उपन्यासकार की भांति प्रेमचंद महान कहानीकार भी थे। आधुनिक हिन्दी कहानी का आविर्भाव दव्वेदी-युग में हुआ। इसी युग में दो प्रमुख कहानीकारों -प्रसाद और प्रेमचंद ने कहानी लिखना प्रारंभ किया था, किन्तु कृतित्व का विकास परवर्ती युग में ही हुआ, जिसे स्वच्छंतावादी युग कहा जाता है। परिमाण और प्रकार दोनों की दृष्टि से प्रेमचंद इस काल के सर्वप्रमुख कहानीकार ठहरते हैं। प्रेमचंद (1880 - 1936) पहले उर्दू में लिखते थे, 1907 में उनके दव्ारा लिखित सोजेवतन उर्दू में प्रकाशित हुआ। जिसे सरकार ने जब्त कर लिया। पंच परमेश्वर सन्‌… (2321 more words) …

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