CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी की अन्य गद्य विधाएँ (Hindi Prose Vidhaaa) Revision (Page 5 of 5)

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हिन्दी गद्य साहित्य का विकास

  • आधुनिक काव्य में गद्य-लेखन की प्रचुरता है। इसी कारण हिन्दी साहित्य के इस युग को गद्यकाल की संज्ञा दी गई है। यह उचित भी है क्योंकि जन साधारण के लिए जिस साहित्य की रचना की जाए, उसकी अभिव्यक्ति का माध्यम जन सामान्य के विचार-विनिमय की भाषा ही होनी चाहिए। वह भाषा गद्य ही है। इसलिए गद्य का प्रचुर प्रयोग होना स्वाभाविक ही है। आधुनिक युग से पूर्व हिन्दी गद्य की रचना नगण्य रूप में हुई।

  • वैज्ञानिक प्रगति ने मुद्रण कला का विकास किया। प्रेस की सुविधा ने लेखन-कार्य को बढ़ावा दिया और जनता की भाषा

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