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19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध की हिन्दी पत्रकारिता

  • हिन्दी गद्य के विकास में हिन्दी समाचार पत्र-पत्रिकाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं इसका विस्तार पूर्वक वर्णन पहले के हिन्दी गद्य के विकास में बता चुके हैं संक्षिप्त में इसका विवरण इस प्रकार है शिक्षा प्रसार तथा धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के प्रभाव से जन सामान्य में जागरूकता आई। समाचार पत्रों की रुचि का विस्तार हुआ।
  • पत्र-पत्रिकाओं के संपादक-इस समय के मुख्य संपादकों में महावीर प्रसाद दव्वेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रूपानारायण पांडेय, गणेश शंकर विद्यार्थी, दुलारेलाल भार्गव, प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत आदि का नाम आदरपूर्वक लिया जाता हें।
  • पत्रिकाएँ- आजकल दैनिक, साप्तािहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक आदि अनेक प्रकार की… (248 more words) …

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जीवनी साहित्य

जीवनी का अर्थ-सत्य घटनाओं के आधार पर किसी के जीवन का पक्षपात रहित वर्णन जीवनी कहलाता हैं। हिन्दी में अनेक महापुरुषों का जीवन-वृतांत लिखा गया उस साहित्य का आरंभ भारतेन्दु युग से हुआ।

हिन्दी के गद्य-साहित्य की विभिन्न विधाओं में जीवनी साहित्य का अपना महत्व हैं। भारतेन्दु युग में नए-नए विषयों को साहित्य के माध्यम से मुखरित करने का प्रयास किया गया था। स्वदेश-प्रेम की दृष्टि से अतीत के महापुरुषों के जीवन को सामने लाकर समाज को उच्च आदर्श के प्रेरणा उनमें से एक था। जीवन लेखन में इस भावना में बड़ा योग था। आरंभ में बिना नाम के… (566 more words) …

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