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साम्यवादी उपन्यास

मार्क्स इस युग का महान दार्शनिक था जिसके प्रभाव से विश्व साहित्य, अछूता न रह सका। फलत: मार्क्स की साम्यवादी विचारधारा ने भारतीय उपन्यास पर भी अपना प्रभाव दिखाया।

  • यशपाल मूलत: समाजवादी उपन्यासकार हैं। उनके उल्लेखनीय सामाजिक उपन्यास हैं- दादा कामरेड, देशद्रोही, मनुष्य के रूप, झूठ सच आदि। नागार्जुन, रांगेय राघव, भैरवप्रसाद गुप्त, अमृतराय भी यशपाल की परंपरा के ही उपन्यासकार हैं। यशपाल ने समाज की जीर्ण मान्यताओं के खोखलेपन को उभारा है।
  • राहुल सांस्कृत्यायन- के सिंह सेनापति, वोल्गा से गंगा तक नामक उपन्यास हैं।
  • नागार्जुन- रतिनाथ की चाची, बलचनमा, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे और दु: खमोचन… (454 more words) …

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आँचलिक उपन्यास

ऐतिहासिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक उपन्यासों की भांति ही आधुनिक युग में उपन्यास का एक और प्रकार विशेष तौर से लोकप्रिय रहा है। यह है आंचलिक उपन्यास। आंचलिक उपन्यास को अधिक लोकप्रियता में लाने का श्रेय फणीश्वरनाथ रेणु को है। श्रीलाल शुक्ल का ’रागदरबारी’ भी एक उल्लेखनीय उपन्यास है जिसमें शहर के साथ लगे एक कस्बे का जीवन व्यंग्यात्मक शैली में चित्रित किया गया हैं। आंचलिक उपन्यास के दव्ारा से किसी प्रदेश विशेष की संस्कृति को उसके नैसर्गिक वातावरण में प्रस्तुत किया जाता है।

  • फणीश्वरनाथ रेणु -इस उपन्यासकारों में फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास मैला आँचल और पती परिकथा विशेष रूप से उदारणीय… (168 more words) …

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