CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी उपन्यास (Hindi Novel) Revision (Page 4 of 6)

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मनोवैज्ञानिक उपन्यास

फ्रायड, युग, एडलर आदि यूरोपीय विचारकों से प्रभावित होकर अनेक उपन्यासकारों ने पात्रों के आंतरिक संघर्ष का चित्रण किया। इनमें जैनेन्द्र, अज्ञेय, इलाचंद्र जोशी, भगवतीचरण वर्मा आदि के नाम प्रमुख हैं।

  • इलाचंद्र जोशी- प्रेत और छाया, संन्यासी और पर्दे की रानी में व्यक्ति की दमित इच्छाओं का वर्णन किया है। उन्होंने मुक्तिपथ में वासना से घृणा करने वाले राजीवन वर्मा को अर्ध मानव के रूप में दर्शाया हैं। इलाचंद्र जोशी ने जैनेंद्र और अज्ञेय से एक भिन्न स्तर पर मनोवैज्ञानिक उपन्यास लिखे। जोशी जी ने

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साम्यवादी उपन्यास

मार्क्स इस युग का महान दार्शनिक था जिसके प्रभाव से विश्व साहित्य, अछूता न रह सका। फलत: मार्क्स की साम्यवादी विचारधारा ने भारतीय उपन्यास पर भी अपना प्रभाव दिखाया।

  • यशपाल मूलत: समाजवादी उपन्यासकार हैं। उनके उल्लेखनीय सामाजिक उपन्यास हैं- दादा कामरेड, देशद्रोही, मनुष्य के रूप, झूठ सच आदि। नागार्जुन, रांगेय राघव, भैरवप्रसाद गुप्त, अमृतराय भी यशपाल की परंपरा के ही उपन्यासकार हैं। यशपाल ने समाज की जीर्ण मान्यताओं के खोखलेपन को उभारा है।
  • राहुल सांस्कृत्यायन- के सिंह सेनापति, वोल्गा से गंगा

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