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सामाजिक उपन्यास

  • सामाजिक उपन्यासकारों में भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर, उपेन्द्रनाथ अश्क, भगवतीप्रसाद वाजपेयी, उदयशंकर भट्ट, सेठ गोविन्ददास, यशपाल, नागार्जुन, भैरवप्रसाद गुप्त, अमृतराय आदि की अपनी विशिष्ट देन है। प्रसाद और कौशिक के बाद बेचन शर्मा उग्र, चतुरसेन शास्त्री आदि ने सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत किया हैं।
  • बेचन शर्मा उग्र ने यथार्थवाद के आग्रह में कहीं-कहीं अनपेक्षित वर्णन भी कर दिए हैं। ’बधुआ की बेटी’ उनकी उल्लेखनीय रचना हैं।
  • आचार्य चतुरसेन ने अपने उपन्यासों में यह व्यक्त किया है कि वासना के प्रभाव से मनुष्य कितनी निचाई तक जा सकता है। सामाजिक उपन्यास के रूप में आचार्य चतुरसेन के धर्मपुत्र, खग्रास और गोली… (331 more words) …

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मनोवैज्ञानिक उपन्यास

फ्रायड, युग, एडलर आदि यूरोपीय विचारकों से प्रभावित होकर अनेक उपन्यासकारों ने पात्रों के आंतरिक संघर्ष का चित्रण किया। इनमें जैनेन्द्र, अज्ञेय, इलाचंद्र जोशी, भगवतीचरण वर्मा आदि के नाम प्रमुख हैं।

  • इलाचंद्र जोशी- प्रेत और छाया, संन्यासी और पर्दे की रानी में व्यक्ति की दमित इच्छाओं का वर्णन किया है। उन्होंने मुक्तिपथ में वासना से घृणा करने वाले राजीवन वर्मा को अर्ध मानव के रूप में दर्शाया हैं। इलाचंद्र जोशी ने जैनेंद्र और अज्ञेय से एक भिन्न स्तर पर मनोवैज्ञानिक उपन्यास लिखे। जोशी जी ने मनोविश्लेषण पर विशेष बल दिया है। उनके उपन्यासों में सन्यासी, पर्दे की रानी, प्रेम और… (340 more words) …

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