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प्रेमचन्द युग

  • शताब्दियाँ बीत जाने के बाद आज भी जब संस्कृत कवियों की गणना की जाती है तो कालिदास का ही नाम गिनती में आता है। इसी प्रकार हिन्दी उपन्यासकारों की गणना करते समय निस्संदेह प्रेमचन्द्र का नाम सर्वप्रथम लिखा जाता है। युग प्रर्वतक उपन्यासकार प्रेमचन्द्र ने उपन्यास को जनजीवन के साथ जोड़ दिया।
  • इस युग में हिन्दी उपन्यास ने बंगला उपन्यास से प्रेरणा ग्रहण की। इसी दृष्टि से अंग्रेजी और बंगला के कई उपन्यास हिन्दी में अनुदित हुए। रवीन्द्र और रमेशचंद दत्त के उपन्यासों को छोड़कर अधिकांश अनुवाद रहस्य-रोमांचपूर्ण अनुवादों के ही हुए। इस काल का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है… (1510 more words) …

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प्रेमचंदोत्तर उपन्यास

  • प्रेमचंद के अनंतर उपन्यास साहित्य में निष्चित रूप से कुछ नई प्रवृत्तियों का समावेश हुआ। प्रेमचंदोत्तर उपन्यास में बाह्य शिल्प विधान में उत्कृष्टता आई हैं। किन्तु इसमें आंतरिक गहराई के दर्शन नहीं होते। इस काल की लेखकों की रचनाओं को किसी निश्चित प्रवृत्ति के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता अत: अध्ययन की सुविधा के लिए उन्हें प्रवृत्तिमूलक वर्गो में विभक्त करना उचित होगा। जिसमें सामाजिक उपन्यास, मनोवैज्ञानिक उपन्यास, साम्यवादी उपन्यास, ऐतिहासिक उपन्यास, प्रयोगवादी उपन्यास।

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