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उपन्यास

  • हिन्दी साहित्य में उपन्यास आधुनिक युग में विकसित हुई गद्य विधा है जो पश्चिमी साहित्य के प्रभाव-स्वरूप जन्मी है। किन्तु यह समझना सत्य की उपेक्षा करना है कि भारत में पहले उपन्यास की सत्ता नहीं थी। संस्कृत साहित्य में कथा सरित्‌सागर, वृहत्कथा, वैताल पंचविंशति, वासदत्ता, दशकुमार चरित, कादंबरी आदि रचनाओं में उपन्यास की सत्ता भलीभाँति देखी जा सकती है। इन रचनाओं में आधुनिक उपन्यास के सभी तत्वों का समावेश खोजकर किया गय है। कुछ उपन्यास बाण की कादंबरी को भारत का प्रथम उपन्यास मानते हैं। परन्तु उसमें अत्यधिक अलौकिकता, भावात्मकता तथा आलंकारिकता की प्रधानता है अत: उसे आधुनिक उपन्यास की… (184 more words) …

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दव्वेदी युग

इस युग में उपन्यास ने कोई दिशा ग्रहण नहीं की। वस्तुत: इस युग में भी उन्हीं उपन्यासकारों का कृतित्व उजागर रहा जो भारतेन्दु युग में उपन्यास के आविर्भाव में सहायक हुए थे। भारतेन्दु-युग में देवकीनन्दन खत्री ने तिलिस्मी-ऐय्यारी उपन्यासों की नींव डाली थी। इस काल में अन्य उपन्यासकारों ने भी उन्हीं की परंपरा का अनुसरण किया। कुछ प्रमुख उपन्यासकार निम्न हैं-

  • हरिकृष्ण जौहर-इन लेखकों में हरिकृष्ण जौहर उल्लेखनीय हैं। उन्होंने ’मयंक मोहनी या माया महल’, कमल कुमारी, भयानक खून, निराला नकाबपोश आदि उपन्यासों में उसी परंपरा का निर्वाह किया।
  • किशोरीलाल गोस्वामी- ने दव्वेदी युग में कई दिशाओं में… (273 more words) …

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