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अन्य में छायावादोत्तर हिन्दी निबंध

रामचंद्र शुक्ल ने हिन्दी निबंध को वैशिष्ट्‌य प्रदान की। शुक्लोत्तर-काल में समीक्षात्मक निबंध ही अधिक लिखे जाते रहे हैं किन्तु निजी अनुभूतियों और भावना की अभिव्यक्ति भी अनेक निबंधकारों ने की है।

  • ललित निबंधों का उदय- आजकल साहित्यिक निबंधों के अलावा ललित निबंधें का विशेष स्थान है। वे लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं। इनमें रोचकता के साथ विषय-वृत्त का विस्तार पाया जाता है। ललित निबंध में कल्पना शीलता और भाव प्रवणता के अलावा विषय पर पूर्णज्ञान अपेक्षित होता है।
  • ललित निबंधकार-इनमें भी हजारी प्रसाद दव्वेदी जी है इनके अलावा वासुदेवशरण अग्रवाल, जैनेन्द्र, प्रभाकर माचवे, रामवृक्ष बेनीपुरी, देवेन्द्र सत्यार्थी,… (526 more words) …

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विषय की दृष्टि से निबंधकारों की नामावली

  • विचार प्रधान निबंधकार-जयशंकर प्रसाद, प्रताप नारायण मिश्र, निराला, प्रेमचंद्र, बाबू गुलाब राय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी आदि।

  • समाजवादी निबंधकार- बालकृष्ण भट्‌ट, यशपाल, रामविलास शर्मा, शिवदान सिंह चौहान, नामवर सिंह।

  • मनोवैज्ञानिक निबंधकार- इलाचंद जोशी, जैनेंद्र, अज्ञेय, बाबू गुलाब राय, लाल जी राम शुक्ल।

  • संस्मरणात्मक - महादेवी वर्मा, बाबू गुलाबराय, रामवृक्ष बेनीपुरी, माधव मिश्र, डॉ. रघवीर सिंह आदि।

  • आलोचनात्मक- जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, श्यामसुन्दर दास, , अज्ञेय, पद्मसिंह शर्मा, हजारी प्रसाद दव्वेदी, बाबू गुलाबराय, नंद दुलारे वाजपेयी, वासुदेव शरण अग्रवाल, नगेंद्र आदि।

  • भावात्मक निबंधकार- राय कृष्ण दास, वियोगी हरि, सियाराम शरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी,… (168 more words) …

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