CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी नाटक (Hindi Drama) Revision (Page 2 of 5)

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दव्वेदी युग में नाटक

  • भारतेन्दु के उपरान्त नाट्‌य-रचना के क्षेत्र में सारा उत्साह जाता रहा। वस्तुत: महावीर प्रसाद दव्वेदी का व्यक्तित्व दूसरी प्रकार का था। यद्यपि नाट्‌यशास्त्र लिखकर उन्होंने नाट्‌य-रचना को दिशा देने का प्रयत्न किया, दव्वेदी तथा उनके समकालीन लेखको ने भाषा तथा अन्य क्षेत्रों में सुधार लाने का भी प्रयत्न किया। साहित्य पर आर्यसमाज की नैतिकता और महात्मा गांधी की आदर्शवादिता का यथेष्ट प्रभाव पड़ा। अत: साहित्य में सुधारवादी दृष्टिकोण प्रधान हो गया। इस युग के लेखक साहित्य में संस्कार लाने के लिए

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प्रसाद युग

  • हिन्दी नाटक साहित्य रूपी विशाल भवन की नींव को भारतेन्दु ने दृढ़ता दी, तो प्रसाद की प्रतिभा ने उसे निखार की ऊँचाई दी। प्रसाद युग हिन्दी नाटक साहित्य का उत्थान काल हैं। जयशंकर प्रसाद ने अनेक ऐतिहासिक नाटक लिखकर भारतीय संस्कृति के उज्जवल पृष्ठ को पाठकों के सामने खोलकर प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजने का यत्न किया। हैं। प्रसाद के नाटकों में मनोवैज्ञानिक चरित्र-चित्रण पर विशेष जोर दिया गया है। उनके प्रसिद्ध नाटक निम्न प्रकार से हैं।

  • प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा

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