CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी नाटक (Hindi Drama) Revision (Page 1 of 5)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

नाटक

  • भरतमुनि ने नाटक को पंचम वेद कहा है। डॉ. दशरथ ओझा के अनुसार नाटक का आरंभ 13वीं शताब्दी में हुआ। उनकी मान्यता है कि ’गाय सुकमार रास’ हिन्दी का पहला नाटक है जो संवत्‌ 1289 में लिखा गया। किन्तु आलोचक उसमें नाटकीय तत्वों का अभाव देखकर उसे हिन्दी का प्रथम नाटक मानने को तैयार नहीं। कुछ विदव्ान मिथिला भाषा के नाटकों को हिन्दी के प्रारंभिक नाटक मानते हैं। विद्यापति दव्ारा रचित ’गोरख विजय’ आदि कई नाटक हैं किन्तु इनका गद्य भाग संस्कृत में और पद्य भाग मैथिली में है। अत: इनकी गणना हिन्दी नाटकों

… (676 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

भारतेन्दु काल

  • नव जागरण का युग हैं जबकि जनसमान्य में राष्ट्रीय चेतना का विकास और समाज में नई जागरूकता दिखाई दी। भारतेन्दु और उनके समकालीन नाटककारों ने अपने नाटकों में जनता की आशाओं को चित्रित किया। भारतेन्दु ही हिन्दी के प्रथम नाटककार कहे जाने के अधिकारी हैं। उन्हें हिन्दी रंगमंच का उत्कृष्ट जनक माना जाता है।

  • अन्य विधाओं की भांति ही नाटक साहित्य का भी भारतेन्दु युग में विकास हुआ। संस्कृत नाटकों की परंपरा के हास के बाद नाटक के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा अभाव सामने आया। हिन्दी के आदिकाल और मध्यकाल मे

… (5571 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In