CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ (Hindi Prose Literature Vidhaaa)-हिन्दी आलोचना (Hindi Criticism) Revision (Page 2 of 2)

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शुक्लोत्तर युग के अलोचक

शुक्लोत्तर युग के अलोचक

  • नंद दुलारे वाजपेयी -यों तो वाजपेयी की समीक्षा छायावादी काव्यालोचन से आरंभ होती हैं। उन्होंने मध्यकालीन संस्कारों को जीवित रखकर आलोचना की है पर यह दृष्टि नवीन रही है। ’साकेत’ का रोना-धोना उन्हें अच्छा नहीं लगा। प्रेमचन्द का आदर्शवाद उन्हें प्रशंसा योग्य नहीं लगा। उनकी रचनाएं कवि निराला, प्रकीर्णिका, आधुनिक साहित्य, नया साहित्य: नये प्रश्न हैं। इन्हें छायावादी, स्वच्छंदतावादी, सौष्ठववादी, रसवादी, अध्यात्मवादी समीक्षक कहा गया है।
  • हजारी प्रसाद दव्वेदी-ये आलोचना की

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आलोचना की आधुनिक पद्धतियाँ

आलोचना की आधुनिक पद्धतियाँ: -आधुनिक हिन्दी साहित्य की विविध रूपों में हुई प्रगति में आलोचना का अपना स्थान है। आलोचना की आधुनिक पद्धतियों पर पश्चिम का प्रभाव हैं परन्तु भारतीय वाङ्‌मय में भी आलोचना होती रही थीं। उनका स्वरूप भिन्न था। विदव्ानों ने उनके कई प्रकार उल्लेखित किए हैं, जैसे टीका, पद्धति, भाष्य पद्धति, शास्त्रार्थ पद्धति, आचार्य पद्धति, निर्णय पद्धति, खंडन-मंडन पद्धति।

  • टीका पद्धति- में शब्दार्थ, व्युत्पत्ति, व्याकरणिक टिप्पणी आदि का प्रयोग होता था।
  • भाष्य पद्धति- में विस्तृत

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