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शुक्लोत्तर युग के अलोचक

शुक्लोत्तर युग के अलोचक

  • नंद दुलारे वाजपेयी -यों तो वाजपेयी की समीक्षा छायावादी काव्यालोचन से आरंभ होती हैं। उन्होंने मध्यकालीन संस्कारों को जीवित रखकर आलोचना की है पर यह दृष्टि नवीन रही है। ’साकेत’ का रोना-धोना उन्हें अच्छा नहीं लगा। प्रेमचन्द का आदर्शवाद उन्हें प्रशंसा योग्य नहीं लगा। उनकी रचनाएं कवि निराला, प्रकीर्णिका, आधुनिक साहित्य, नया साहित्य: नये प्रश्न हैं। इन्हें छायावादी, स्वच्छंदतावादी, सौष्ठववादी, रसवादी, अध्यात्मवादी समीक्षक कहा गया है।
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शुक्ल युग के आलोचक

शुक्ल युग के आलोचक

रामचन्द्र शुक्ल (1884 - 1941)

आलोचना के क्षेत्र में शुक्ल जी ने नए मानदंडों की स्थापना की। ’रसमीमांसा’ के दव्ारा शुक्ल जी ने समीक्षा के नए सिद्धांत और नई पद्धतियां प्रस्तुत करके आलोचना के क्षेत्र में युगान्तर उपस्थित कर दिया और उसे नई दिशा दी हैं।

  • शुक्ल जी की समीक्षाएँ व शैलियाँ-आधुनिक आलोचकों में अग्रणी माने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी साहित्य का इतिहास ही नहीं
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