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आलोचना की आधुनिक पद्धतियाँ

आलोचना की आधुनिक पद्धतियाँ: -आधुनिक हिन्दी साहित्य की विविध रूपों में हुई प्रगति में आलोचना का अपना स्थान है। आलोचना की आधुनिक पद्धतियों पर पश्चिम का प्रभाव हैं परन्तु भारतीय वाङ्‌मय में भी आलोचना होती रही थीं। उनका स्वरूप भिन्न था। विदव्ानों ने उनके कई प्रकार उल्लेखित किए हैं, जैसे टीका, पद्धति, भाष्य पद्धति, शास्त्रार्थ पद्धति, आचार्य पद्धति, निर्णय पद्धति, खंडन-मंडन पद्धति।

  • टीका पद्धति- में शब्दार्थ, व्युत्पत्ति, व्याकरणिक टिप्पणी आदि का प्रयोग होता था।
  • भाष्य पद्धति- में विस्तृत व्याख्या होती थी। ब्रह्यसूत्र पर शंकर भाष्य, शंकर भाष्य पर भामती भाष्य इसी तरह की आलोचना पद्धति थी।
  • शास्त्रार्थ… (934 more words) …

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आलोचना का आरंभ

  • आलोचना का आरंभ: - अन्य गद्य विधाओं की भाँति आलोचना का आरंभ भी भारतेन्दु युग में हुआ हैं। भारतेन्दु ने ’नाटक’ नामक एक सैद्धांतिक आलोचानात्मक निबंध लिखा।

    भारतेन्दु युग के आलोचक-

  • बालकृष्ण भट्‌ट- ने अपने मासिकपत्र ’हिन्दी प्रदीप- में लाला ’श्रीनिवास दास कृत ’संयोगिता स्वयंवर की आलोचना की हैं।

दव्वेदी युग के आलोचक

  • आचार्य महावीर प्रसाद दव्वेदी- ने हिन्दी आलोचना को नई शक्ति दी। कालिदास की निरंकुशता, नैषध चरित चर्चा, विक्रमांकदेव चरित चर्चा आदि उनकी आलोचनाएँ हैं।
  • मिश्रबंधुओ- ने हिन्दी नवरत्न लिखकर तुलनात्मक आलोचना का सूत्रपात किया। इस ग्रंथ में देव को सबसे अच्छा कवि सिद्ध किया… (53 more words) …

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